सीहोर। जुलाई व अगस्त माह में प्याज बेचने के बाद भी किसान भुगतान मिलने की बाट जोहते रहे, लेकिन जब उन्हें भुगतान किए बिना प्याज को ट्रकों में भरकर बाहर भेजा जाने लगा तो वह आक्रोशित हो उठे और उन्हें बीती शाम प्याज से भरे ट्रकों को जाने से रोकते हुए पहले भुगतान करने की मांग की. इस दौरान किसान नारेबाजी भी करते रहे.
शहर से करीब 5 किमी दूर वेयर हाउस में बीती रात उस समय हंगामा शुरु हो गया जब किसानों को पता चला कि वेयर हाउस से उनकी प्याज को कानपुर भेजा जा रहा है. गुस्साए किसानों ने रात में ही वेयर हाउस पहुंचकर कानपुर जा रही प्याज की खेप को रोक दिया. किसानों का आरोप था कि पिछले 3 महीने से उनका भुगतान नहीं हुआ है, ऐसे में अब उनकी प्याज बाहर कैसे भेजी जा रही है. रातभर किसान वहीं वेयर हाउस के गेट पर बैठे रहे और बोले कि जब तक उनके प्याज का भुगतान नहीं होगा वे यहां से एक कट्टी प्याज भी बाहर नहीं जाने देंगे. अगले दिन भी किसान वेयर हाउस में ही डटे रहे.
गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता संघ की संकल्पित कृषि उत्थान प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी ने 16 जुलाई से 1 अगस्त के बीच वेयर हाउस पर प्याज की खरीदी की थी. कुल 44 किसानों से करीब 9 हजार क्विंटल प्याज खरीदी गई थी. नियमानुसार इन किसानों को एक सप्ताह में भुगतान करना था, लेकिन करीब 3 महीने का समय बीतने के बाद भी अब तक 27 किसानों के प्याज का भुगतान नहीं किया है. इन किसानों को प्याज के भुगतान के रूप में करीब 70 लाख रुपए लेना हैं. ऐसे में मंगलवार देर रात करीब 12 बजे किसान इंदौर रोड स्थित वेयर हाउस पहुंचे और प्याज ले जा रहे ट्रक के सामने बैठ गए. रात भर किसान यहां डटे रहे. सुबह संघ के कर्मचारी यहां पहुंचे और किसानों को समझाईश दी, लेकिन किसान नहीं माने. बुधवार को दिनभर किसान यहां बैठे रहे. उन्हें डर सता रहा था कि यदि प्याज कहीं और शिफ्ट हो गई तो फिर भुगतान नहीं मिल पाएगा.
किसान भगवान सिंह ने बताया कि कंपनी की इंदौर ब्रांच मैनेजर अपर्णा सिंह को कई बार उन्होंने फोन लगाया, लेकिन वे किसानों के फोन ही नहीं उठाती हैं. शुरुआती दौर में जब उन्होंने फोन उठाया था तब उन्होंने कहा था कि जल्दी भुगतान हो जाएगा, लेकिन एक महीने से ज्यादा समय बीत गया है, अब तक किसानों का भुगतान नहीं हुआ है. जिससे वह काफी परेशान हो गए हैं. मजबूर होकर किसानों को वेयरहाउस से जा रहे ट्रकों को रोकना पड़ा .
भुगतान के संबंध में कंपनी से चर्चा करेंगे
मेरी जानकारी में आज ही यह मामला आया है, यदि किसान इस संबंध में हमें कोई लिखित में पत्र या सूचना देते हैं तो हम संबंधित कंपनी से पत्राचार कर किसानों का भुगतान करवाने की प्रक्रिया करेंगे. कंपनी ने किसानों से प्याज खरीदी है तो उन्हें भुगतान करना होगा. शीघ्र उचित कार्रवाई करते हुए किसानों का बकाया भुगतान दिलवाया जाएगा.
जगदीश सिंह मुझाल्दा , सहायक संचालक उद्यानिकी
किसानों को प्याज ब्रिकी के लेना है लाखों रुपए
गुड़भेला निवासी किसान भगवान सिंह का करीब 3 लाख 54 हजार से ज्यादा भुगतान बाकी है. इसी तरह कन्नौद मिर्जी निवासी गुलाबचंद पाटीदार का तो करीब 9.59 लाख रुपए का भुगतान नहीं हुआ है. लालाखेड़ी के मंगलेश वर्मा के प्याज का भी 6.50 लाख रुपए भुगतान बाकी है. छतरपुरा के बाबूलाल का 6.27 लाख रुपए, मुस्करा के रामचरण वर्मा का 3.50 लाख रुपए, नानूखेड़ी के बाबूलाल पाटीदार का 4.15 लाख रुपए, नानूखेड़ा के ही अशोक पाटीदार का 1.15 लाख रुपए, मुस्करा के देवकरण वर्मा का 2.76 लाख रुपए आमलाताज निवासी कमल किशोर का 1.22 लाख रुपए नानूखेड़ा के सागरमल पाटीदार का 4.15 लाख रुपए, उतपुरा के विजेंद्र वर्मा का 2.45 लाख और किसान हरिओम का 3.85 लाख रुपए का भुगतान बाकी है.
15 दिन तक चली थी प्याज की खरीदी
संकल्पित कृषि उत्थान प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी ने 16 जुलाई से 1 अगस्त तक वेयर हाउस पर प्याज की खरीदी की थी। इस दौरान कुल 44 किसानों से 9 हजार क्विंटल प्याज की खरीदी हुई थी। जिसका भुगतान करीब 1.02 करोड़ रुपए कंपनी को करना थे। यह भुगतान 7 दिनों के अंदर करना था। लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। बाद में जब किसानों ने दबाव बनाया तो इनमें से कुछ किसानों को भुगतान कर दिया गया। लेकिन 27 किसान अब भी ऐसे हैं जिनका भुगतान नहीं किया जा रहा है।
