
भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा सेवा संबंधी मामलों में तेजी से बढ़ती याचिकाओं पर चिंता जताते हुए उनके समाधान के लिए आंतरिक तंत्र विकसित करने की सलाह दिए जाने का मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने स्वागत किया है।
एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए नायक ने कहा कि हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि वर्तमान में करीब 50 हजार सेवा प्रकरण लंबित हैं, जिससे न्यायपालिका पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है। अदालत ने अपने आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। नायक ने कहा कि कर्मचारियों को छोटे और जायज सेवा संबंधी मुद्दों के लिए भी अदालत का सहारा लेना पड़ रहा है, जो मौजूदा शिकायत निवारण प्रणाली की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि न केवल लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक है, बल्कि हजारों ऐसे प्रकरण भी हैं जिनमें अदालतों के फैसले आ चुके हैं, फिर भी अनुपालन नहीं हो पाया है। हाईकोर्ट इस स्थिति को लेकर प्रशासन को कई बार आगाह कर चुका है। सुषीला देवी प्रकरण सहित पूर्व मामलों में समान परिस्थितियों में एक निर्णय को समान रूप से लागू करने के निर्देश व्यवहार में नहीं उतारे गए।
नायक ने कहा कि परामर्श समितियां, आंतरिक शिकायत समितियां, कर्मचारी कल्याण समितियां और कर्मचारी मामलों के प्रभारी मंत्री जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी साबित नहीं हुईं। वर्ष 2003 में राज्य प्रशासनिक अधिकरण के समाप्त होने से सभी सेवा मामले हाईकोर्ट में चले गए।
संघ ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में प्रशासनिक अधिकरण की पुनः स्थापना या कर्मचारी मध्यस्थता अधिकरण गठित करने की मांग की है।
