विकलांग तथा मानसिक रूप बीमार पीड़िता को गर्भपात की अनुमति

जबलपुर: हाथ-पैर से विकलांग तथा मानसिक रूप से बीमार युवती को हाईकोर्ट ने गर्भपात की अनुमति प्रदान की है। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसे मामलों में अन्य पारिवारिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना आवश्यक है। पीड़ित के माता-पिता ने गर्भपात के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की है। मेडिकल बोर्ड की राय और उपरोक्त मामलों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णयों के आधार पर गर्भपात की अनुमति प्रदान की जाती है।

गौरतलब है कि खंडवा जिला न्यायालय ने मानसिक रूप से बीमार तथा हाथ-पैर से विकलांग 22 वर्षीय युवती की गर्भपात की अनुमति के लिए हाईकोर्ट को पत्र लिखा था। हाईकोर्ट ने पीडिता की मेडिकल रिपोर्ट भेजने के लिए जिला चिकित्सालय खंडवा को निर्देश जारी किये थे। जिला चिकित्सालय ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पीड़ित की गर्भावधि 28 से 30 सप्ताह के बीच है।

गर्भावस्था 24 माह से अधिक होने पर गर्भपात के लिए मेडिकल बोर्ड की ओपिनियन आवष्यक है। मेडिकल बोर्ड मे रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता होती है। जिला चिकित्सालय में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। इसलिए पीडिता को इलाज हेतु टर्सरी केयर सेंटर एमटीएच महिला अस्पताल इंदौर रेफर किया जाये। मेडिकल बोर्ड की राय अनुसार गर्भावस्था की समाप्ति जोखिम है।

एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पारिवारिक पहलुओं पर भी विचार किया जाना आवश्यक है। पीडिता के माता पिता ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा है कि विकलांग व मानसिक रूप से बीमार होने के कारण बच्चे को पालन में असमर्थ है।एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पीड़िता अपने माता-पिता के साथ आज या कल 11 नवम्बर को शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल खंडवा के समक्ष उपस्थित रहे। जिससे गर्भपात यथाशीघ्र किया जा सके। गर्भपात के संबंध में डॉक्टरों की एक विशेष टीम निर्णय लेगी। गर्भपात की प्रक्रिया विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम की उपस्थिति में की जाए।

पीडिता व उसके परिवार सदस्यों को गर्भपात के जोखिम और अन्य के संबंध में समझाया जाये। गर्भपात करते समय डॉक्टरों द्वारा हर संभव सावधानी बरती जाएगी। पीडिता को सभी प्रकार की चिकित्सा देखभाल और अन्य चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी। जिनमें एक बाल रोग विशेषज्ञ के साथ-साथ एक रेडियोलॉजिस्ट और अन्य आवश्यक डॉक्टर भी शामिल हैं। आवश्यकतानुसार ऑपरेशन के बाद वश्यकतानुसार देखभाल की जाये।

बच्चा जीवित पैदा होता है। भ्रूण का एक नमूना डीएनए परीक्षण के लिए सुरक्षित रखा जाए और आवश्यकता पड़ने पर आपराधिक मामले में उपयोग के लिए अभियोजन पक्ष को सौंप दिया जाए। आदेश की प्रति कार्रवाई के लिए डीन एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर और डीन शासकीय मेडिकल कॉलेज विशेष न्यायाधीश तथा पुलिस अधीक्षक खंडवा को भेजने के आदेश जारी किये ।

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