
नई दिल्ली, 08 नवम्बर (वार्ता): अमेरिकी खुफिया एजेंसी (सीआईए) के पूर्व अधिकारी रिचर्ड बार्लो ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका दावा है कि 1980 के दशक में भारत और इजराइल ने मिलकर पाकिस्तान को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए उसके कहुटा प्लांट पर गुप्त हवाई हमला करने की योजना बनाई थी। बार्लो ने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इस हमले को रोकने के फैसले को ‘शर्मनाक’ बताया।
कहुटा प्लांट को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का दिल माना जाता था। बार्लो के अनुसार, भारत को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी, जबकि इजराइल को मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन बिगड़ने का डर था। हमले का मुख्य उद्देश्य इस्लामाबाद को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना था। बार्लो ने कहा कि अगर यह हमला हो जाता तो बहुत सारी समस्याएं हल हो जातीं और क्षेत्र में अस्थिरता कम हो सकती थी।
बार्लो ने बताया कि इस योजना के नाकाम होने का एक बड़ा कारण अमेरिका का विरोध भी था। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन की सरकार ऐसे किसी भी हमले का कड़ा विरोध करती थी, क्योंकि अमेरिका अफगानिस्तान में सोवियत संघ के खिलाफ अपनी लड़ाई में पाकिस्तान की मदद पर निर्भर था। बार्लो ने संकेत दिया कि पाकिस्तान ने इसी निर्भरता का फायदा उठाकर अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
