
नई दिल्ली, 04 नवम्बर 2025: भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, उद्योगपति और समाजसेवी जमनालाल बजाज का जन्म 4 नवंबर 1889 को हुआ था। वे न केवल बजाज समूह के संस्थापक थे, बल्कि महात्मा गांधी के अत्यंत निकट सहयोगी भी रहे, जो उन्हें स्नेहपूर्वक अपना ‘तीसरा पुत्र’ कहा करते थे। जमनालाल बजाज ने कारोबार को केवल लाभ का साधन नहीं माना, बल्कि इसे समाजसेवा और राष्ट्रनिर्माण का माध्यम बनाया। युवावस्था से ही उन्होंने समाज सुधार, स्वदेशी उद्योग और दान-धर्म के क्षेत्र में गहरी रुचि दिखाई।
जमनालाल बजाज ने अपने उद्योगों में स्वदेशी सिद्धांत को अपनाया और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। गांधीजी के आदर्शों से प्रेरित होकर उन्होंने वर्धा (महाराष्ट्र) को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहाँ ‘सर्वोदय आश्रम’ सहित कई शैक्षणिक व सामाजिक संस्थाओं की स्थापना की। वे हरिजन उत्थान, अछूतों के मंदिर में प्रवेश और स्त्री शिक्षा जैसे सुधारों के प्रबल समर्थक थे। उनका जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था; उन्होंने स्वयं खादी पहनने, स्वदेशी वस्त्रों का प्रयोग करने और सादा जीवन जीने का संकल्प लिया था।
जमनालाल बजाज असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और विदेशी वस्त्रों की होली जैसे आंदोलनों में सक्रिय रहे और कई बार जेल गए। उनका मानना था कि सच्चा देशभक्त वही है, जो अपने कर्म से समाज को ऊपर उठाए। 11 फरवरी 1942 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनके आदर्श आज भी जीवित हैं। उनके सम्मान में भारत सरकार ने ‘जमनालाल बजाज पुरस्कार’ की स्थापना की है, जो गांधीवादी सिद्धांतों और समाजसेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।
