संकट काल में ही नेतृत्व की पहचान: जनरल द्विवेदी

सतना. थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि संकटकालीन परिस्थितियों की चुनोतियो का मुकाबला कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता और संयम से ही वास्तविक नेतृत्व की पहचान होती है। वे शनिवार को शासकीय अटल बिहारी बाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय में चिकित्सा शिक्षकों एवं एमबीबीएस के छात्रों को संबोधित कर रहे थे.

इस मौके पर महाविद्यालय के डीन डॉ. एस. पी. गर्ग ने सेनाध्यक्ष को शॉल-श्रीफल एवं माँ शारदा की तस्वीर स्मृति चिन्ह के रूप में भेंट की। बाद में सेनाध्यक्ष जनरल द्विवेदी ने भी डॉ. गर्ग को उनकी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता के लिए मेडल और अपनी ओर से स्मृति चिह्न भेंट किया।कार्यक्रम में राष्ट्र और समाज को सुदृढ़ करने में सशस्त्र बलों और चिकित्सकों की समान भूमिका पर बोलते हुए जनरल ने कहा कि दोनों ही वर्ग मानवता की सेवा में अग्रणी हैं और देश की रीढ़ हैं।उन्होंने कहा कि अनुशासन और सेवा का महत्व व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में सफलता और सम्मान का मुख्य आधार है। जनरल द्विवेदी ने बताया कि

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा में चिकित्सकों के लिए अच्छा अवसर है.उन्होंने युवा चिकित्सकों को इससे जुड़कर राष्ट्रसेवा का गौरव प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में चिकित्सकों की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सैनिकों की . दोनों ही जीवन की रक्षा के लिए समर्पित हैं.समारोह की अध्यक्षता करते हुए डीन डॉ. गर्ग ने सेनाध्यक्ष के आगमन को महाविद्यालय के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह अवसर संस्थान के विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में नई प्रेरणा का संचार करेगा। साथ ही उन्होंने समस्त महाविद्यालय परिवार की ओर से भारतीय सेना को “ऑपरेशन सिंदूर” एवं राष्ट्र की सतत सुरक्षा में उनके अद्वितीय योगदान के लिए साधुवाद दिया और आभार प्रकट किया।कार्यक्रम के अंत में डॉ. अम्बरीश मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि,

विद्यार्थियों के लिए यह सत्र एक अद्वितीय मेंटरशिप अनुभव रहा। जनरल का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि ऊँचाइयों पर पहुँचकर भी व्यक्ति अपनी जड़ों से कैसे जुड़ा रह सकता है.उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आज राज्य स्थापना दिवस होने के साथ यह विंध्य और मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है कि वर्तमान में देश के थल और जल दोनों सेनाओं के प्रमुख इसी प्रदेश की माटी के सपूत हैं।कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका चौबे ने किया। अंत में सेनाध्यक्ष के साथ महाविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों का सामूहिक फोटो सेशन भी आयोजित किया गया।कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकगण, विद्यार्थी एवं अधिकारीगण एवं शहर के विशिष्ट जन उपस्थित रहे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

डॉ प्रजापति की टीम ने बनाई ऑपरेशन सिंदूर रंगोली

सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी के आगमन अवसर पर महाविद्यालय परिसर में डॉ. मनोज प्रजापति एवं उनकी टीम ने “ऑपरेशन सिंदूर” शीर्षक वाली रंगोली बनाई थी.जिसका उन्होंने अवलोकन किया। इस अनूठी रचना की विषयवस्तु और भावना से प्रभावित होकर उन्होंने डॉ. मनोज प्रजापति को “ऑपरेशन सिंदूर मेडल” से सम्मानित किया।इसके पूर्व अधिष्ठाता डॉ. एस. पी. गर्ग ने सेनाध्यक्ष का महाविद्यालय परिसर में पहुचने पर पुष्पगुच्छ से स्वागत किया.

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