वन विहार में शीत-रक्तीय जीवों पर सर्दी की मार, तापीय व्यवस्था बनी चिंता का विषय

आशीष कुर्ल भोपाल। राज्य की राजधानी के बीचों-बीच स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, जहां समृद्ध जैव विविधता और शहरी सुविधा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। विशाल हरित क्षेत्र में फैला यह उद्यान पर्यटकों को लगभग प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने का अवसर देता है। यहां क्षेत्र में पाई जाने वाली लगभग सभी प्रमुख प्रजातियों के जीव देखे जा सकते हैं, जिससे वर्ष भर प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है।

हालांकि, इस संवाददाता की हालिया यात्रा के दौरान ठंड के मौसम में शीत-रक्तीय जीवों के बाड़ों की व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई। सर्दियों के आगमन के साथ ही सांप, कछुए और इगुआना जैसे जीव, जो अपने शरीर का तापमान बाहरी वातावरण पर निर्भर होकर नियंत्रित करते हैं, अपर्याप्त तापीय व्यवस्था वाले बाड़ों में रखे पाए गए।

विशेषज्ञों का कहना है कि शीत-रक्तीय जीव सर्दियों में बहुत कम भोजन करते हैं, जब तक कि कैद में उन्हें पर्याप्त गर्मी, प्रकाश और आर्द्रता उपलब्ध न कराई जाए। कुछ समशीतोष्ण क्षेत्रों के कछुए प्राकृतिक रूप से शीतनिद्रा में चले जाते हैं, लेकिन उष्णकटिबंधीय प्रजातियां, जैसे इंडियन स्टार टॉरटॉइज़, ठंड के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं और उन्हें निरंतर गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है। इसी तरह इगुआना के लिए संतुलित तापमान, पराबैंगनी प्रकाश (यूवीबी) और उच्च आर्द्रता अनिवार्य है।

निरीक्षण के दौरान कई बाड़ों में थर्मोस्टेट नियंत्रित हीटिंग सिस्टम, यूवीबी लाइट, डिजिटल थर्मामीटर और ह्यूमिडिटी मॉनिटर जैसे आवश्यक उपकरणों का अभाव पाया गया। संरक्षण विशेषज्ञ डॉ. बीपी यादव ने चेतावनी दी कि इन सुविधाओं की कमी से जीवों में तनाव, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

इस संबंध में संपर्क किए जाने पर फील्ड डायरेक्टर विजय कुमार ने समस्या को स्वीकार करते हुए बताया कि सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नए बाड़ों का निर्माण कार्य जारी है और पूरा होने के बाद थर्मोस्टेट नियंत्रित हीटिंग सिस्टम सहित सभी आवश्यक सुविधाएं स्थापित की जाएंगी।

वन विहार प्रबंधन का कहना है कि पशु कल्याण उनकी प्राथमिकता है और प्रस्तावित उन्नयन से सर्दियों में शीत-रक्तीय जीवों के रहने की स्थितियों में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिससे उद्यान आधुनिक चिड़ियाघर प्रबंधन और संरक्षण मानकों के अनुरूप हो सकेगा।

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