सारनी: सतपुड़ा थर्मल पावर प्लांट की नौ इकाइयों की हालिया नीलामी के बाद प्लांट और स्थानीय अर्थव्यवस्था के भविष्य पर काला साया छा गया है। पहले पाँच छोटी इकाइयों को जमींदोज किया जा चुका है और अब चार पुरानी बड़ी इकाइयों की भी नीलामी में बिक्री हो जाने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है।जानकारों के अनुसार चारों बड़ी इकाइयाँ जिनमें बोयलर और टरबाइन स्वदेशी लगे थे करीब 15 हजार करोड़ की लागत से बनी थीं और इन्हें नवीनीकरण कर वर्तमान क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन में लगाया जा सकता था।
फिर भी इन्हें नवीनीकरण के बजाय बेचा गया। अब यह सवाल उठ रहा है कि जिन इकाइयों का वैल्यूएशन लगभग 1,000 करोड़ आंका गया था, उन्हें मात्र 342 करोड़ में क्यों बेचा गया।पावर प्लांट की नौ इकाइयों की संयुक्त उत्पादन क्षमता पहले लगभग 1,157 मेगावाट थी, (6 नंबर: 200 मेगावाट; 7, 8, 9 नंबर: 210-210 मेगावाट; पाँच छोटी इकाइयाँ: कुल 327.5 मेगावाट)। प्रतिनिधियों का कहना है कि इन नीलामियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाना चाहिए।
