जबलपुर: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आईटीआई में प्रमोशन से जुड़े मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि ऐसा प्रतीत होता है कि डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी आयोजित करने में अधिकारियों द्वारा विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने डीपीसी को अवैधानिक पाते हुए उसे निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
भोपाल निवासी मनोज कुमार अग्रवाल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि विभाग ने 7 नवंबर 2014 में डीपीसी आयोजित की थी। इसमें सीनियोरिटी सब्जेक्ट टु फिटनेस का क्राइटेरिया अपनाते हुए पिछले 5 वर्षों में कट-ऑफ मार्क्स 13 रखे गए। यह डीपीसी ट्रेनिंग सुपरिन्टेंडेंट से प्रिंसिपल ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति के लिए आयोजित की गई थी।
याचिकाकर्ता को इसलिए अनफिट बताया गया क्योंकि उसे 12 अंक मिले थे, लेकिन उसकी वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए जूनियर्स को प्रमोशन दिए गए। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता की वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए कनिष्ठों को प्रमोशन देना अनुचित है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि जूनियर्स को दिए गए प्रमोशन को डिस्टर्ब किए बिना याचिकाकर्ता को भी उसी तिथि से प्रिंसिपल ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नति का लाभ दिया जाए।
