महाराष्ट्र में स्थानीय चुनावों में मिटने वाली स्याही के उपयोग पर विपक्ष का आरोप, चुनाव आयोग ने खारिज किये आरोप

मुंबई, 15 जनवरी (वार्ता) महाराष्ट्र में विपक्षी नेताओं ने एकजुट होकर गुरुवार को स्थानीय निकाय चुनावों में अमिट स्याही की जगह कथित तौर पर ‘मिटने वाली’ के प्रयोग को लेकर कार्रवाई की मांग की है, हालांकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है।

श्री फडणवीस ने इन आरोपों को हार के लिए पहले से तैयार किया गया एक बहाना बताया और नागपुर में अपना वोट डालने के बाद पत्रकारों को अपनी स्याही लगी उंगली दिखाई तथा कैमरे के सामने उसे रगड़कर साबित किया कि निशान फीका नहीं पड़ा है।

उद्धव ठाकरे (शिवसेना यूबीटी), राज ठाकरे (मनसे) और कांग्रेस तथा आप के प्रतिनिधियों सहित विपक्षी नेताओं ने इस संबंध में चिंता व्यक्त की है। उद्धव ठाकरे ने चुनावी अखंडता को कमजोर करने के लिए राज्य चुनाव अयोग और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच ‘मिलीभगत’ का आरोप लगाया है और राज्य चुनाव आयुक्त के निलंबन की मांग की है।

राज ठाकरे ने पूछा, “लोग बाहर आते हैं, स्याही पोंछते हैं और फिर से वोट डालने के लिए अंदर जाते हैं। फिर वे बाहर आते हैं, इसे फिर से पोंछते हैं और दोबारा प्रवेश करते हैं। क्या सरकार इसे ही विकास कहती है?” उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन को लाभ पहुँचाने के लिए प्रणाली का दुरुपयोग किया जा रहा है।

श्री ठाकरे ने दादर में अपना वोट डालने के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि मतदाताओं की उंगलियों पर लगे निशान को सैनिटाइजर से पोंछा जा सकता है, जिससे दोबारा मतदान संभव हो जाता है। उन्होंने सरकार और चुनाव प्रशासन पर ऐसे वाकयों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने अपना वोट डालने के बाद एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने दिखाया कि उनकी उंगली पर लगाई गई अमिट स्याही को कथित तौर पर ‘नेल पॉलिश रिमूवर’ का उपयोग करके हटाया जा सकता है। वीडियो में श्री सावंत ने दावा किया, “मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रदर्शित किया है कि नेल पॉलिश रिमूवर का उपयोग करके स्याही को हटाया जा सकता है।”

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकंपा-एसपी) के रोहित पवार ने तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की और सवाल किया कि क्या ‘निम्न गुणवत्ता’ वाली सामग्री की खरीद भ्रष्टाचार या जानबूझकर बनाए गए दबाव का परिणाम थी।

इस बीच, महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए गुरुवार को कहा कि सिल्वर नाइट्रेट से बनी यह वही स्याही है, जिसका उपयोग निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाता है।

इन बयानों का जवाब देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने अपने मताधिकार का प्रयोग करने के बाद उंगलियों से स्याही पोंछने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

श्री शेलार ने कहा, “जो लोग स्याही पोंछ रहे हैं वे फर्जी मतदान का प्रयास कर रहे हैं। उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए और गहन जांच की जानी चाहिए। चुनाव की पवित्रता की रक्षा करने और स्याही को लेकर भ्रम पैदा करने के पीछे के वास्तविक मकसद का पता लगाने के लिए सख्त कार्रवाई आवश्यक है। चुनाव आयोग के खिलाफ टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना है।”

उपनगरीय मुम्बई के गोरेगांव, अंधेरी, मलाड, पवई और कांदिवली के विभिन्न बूथों के कई मतदाताओं ने आरोप लगाया कि वोट डालने के बाद उंगलियों पर स्याही लगाने के लिए चुनाव अधिकारियों द्वारा साधारण मार्कर पेन का उपयोग किया गया था। केवल सरकार द्वारा निर्मित अमिट स्याही का उपयोग करने की मानक प्रथा से इस तरह के विचलन को लेकर मतदाताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही के निशान आसानी से मिटने की इसी तरह की घटनाएं कोल्हापुर जिले के साथ-साथ पुणे से भी सामने आईं।

श्री वाघमारे ने नेताओं द्वारा उठाई गई चिंताओं का जवाब देते हुए कहा, “यदि कोई छेड़छाड़ करता है और दोबारा वोट देता है, तो हम मामला दर्ज करेंगे”। उन्होंने दोहराया कि यह स्याही 2010 से उपयोग में है और इसके आसानी से हटाने योग्य दावों को ‘फर्जी’ कहकर खारिज कर दिया।

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि ‘चुनावी कदाचार में शामिल होने’ के लिए स्याही हटाने का प्रयास करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने भी इन दावों का जवाब देते हुए एक बयान जारी कर सभी आरोपों और मीडिया रिपोर्टों को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताया।

 

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