अमेरिका में भारी शुल्क से घरेलू चमड़ा क्षेत्र की कारोबारी आय में आ सकती है 10-12 प्रतिशत कमी: क्रिसिल

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (वार्ता) रेटिंग एजेंसी क्रिसिल रेटिंग्स के एक ताजा विश्लेषण में कहा गया है कि अमेरिका में भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत तक के ऊंचे आयात शुल्क से भारत के चमड़ा उद्योग की आय सालाना आधार पर 10-12 प्रतिशत तक गिर सकती है और इकाइयों का परिचालन लाभ भी दो से तीन प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है।

क्रेडिट रेटिंग इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ इंडिया लिमिटेड (क्रिसिल) ने गुरुवार को जारी एक विश्लेषण में कहा है कि भारतीय चमड़ा उद्योग की निर्यात पर निर्भरता तथा अमेरिकी बाजार में बेचे जाने वाले तैयार चर्म उत्पादों पर अच्छी आय के चलते निर्यात क्षेत्र के साथ पूरे उद्योग का आय और परिचालन लाभ प्रभावित होगा। विश्लेषण के अनुसार, निर्यात कारोबार में परिचालन लाभ पर ढाई से तीन प्रतिशत और पूरे उद्योग के परिचालन लाभ में डेढ़ से दो प्रतिशत की कमी आ सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में कमी, आयकर में रियायत, मुद्रास्फीति और ब्याज दर में कमी से घरेलू बाजार में खपत बढ़ेगी और निर्यात में गिरावट का असर कुछ कम होगा।

क्रिसिल ने कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में निर्यात का 50 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय संघ और 22 प्रतिशत अमेरिकी बाजार में गया था। अमेरिका में शुल्क 50 प्रतिशत होने के कारण वहां के लिए निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और ऑर्डर रद्द कर दिये गये हैं या रोक निलंबित कर दिये गये हैं। अमेरिका के बाजार पर निर्भर कई टेनरियों और चमड़ा उत्पाद तैयार करने वाली छोटी इकाइयों का काम पिछले दो महीने से बंद पड़ा है।

क्रिसिल के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के युक्तिकरण के बाद घरेलू मांग में मामूली सुधार के साथ-साथ आयकर में छूट, मुद्रास्फीति में नरमी और ब्याज दरों में गिरावट जैसे कई अनुकूल वृहद-आर्थिक कारकों के बावजूद चमड़ा उद्योग के कारोबार में इतनी बड़ी गिरावट के आसार इसलिए हैं क्योंकि इस क्षेत्र का ज्यादा ध्यान निर्यात पर केंद्रित रहा है।

क्रिसिल रेटिंग्स की निदेशक जयश्री नंदकुमार ने कहा, “अमेरिका से ऑर्डर कम होने के कारण, चालू वित्त वर्ष में मात्रा के हिसाब से निर्यात में 13-14 प्रतिशत की गिरावट आने की उम्मीद है। इसका राजस्व पर और अधिक असर पड़ेगा क्योंकि अमेरिका को होने वाले निर्यात में बड़ा हिस्सा जूते और चमड़े के तैयार सामानों का होता है, जिनसे अपेक्षाकृत अधिक आय प्राप्त होती है।”

सुश्री नंदकुमार का कहना है कि अमेरिका में भेजे जाने वाले ऐसे सामानों से प्राप्त राजस्व प्रति इकाई 14 डॉलर के आसपास है जो सम्पूर्ण तैयार चर्म उत्पादों के प्रति इकाई निर्यात राजस्व की तुलना में 14-15 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार, इस वित्त वर्ष में चमड़ा क्षेत्र का निर्यात राजस्व 14-16 प्रतिशत घटकर 3.9-4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।

क्रिसिल के अनुसार, चमड़ा और संबद्ध उत्पाद उद्योग ने वित्त वर्ष 2024-25 में 56,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया था जिसमें निर्यात आय का हिस्सा 70 प्रतिशत था।

घरेलू बाजार की स्थिति पर क्रिसिल ने कहा है कि चमड़े के उत्पादों पर जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत करने से इनकी सामर्थ्य में वृद्धि और प्रीमियमीकरण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बजट में घोषित आयकर लाभ, भारतीय रिज़र्व बैंक की नीतिगत दरों में कटौती कम ब्याज दरों में नरमी और स्थिर मुद्रास्फीति से घरेलू खपत को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

क्रिसिल रेटिंग्स की एसोसिएट डायरेक्टर अतुल श्रीलता ने कहा, ”चमड़ा निर्माण अत्यधिक श्रम प्रधान है और इसमें वेतन-मजदूरी, किराये और रखरखाव सहित अन्य खर्चों के रूप में 25-30 प्रतिशत की बड़ी लागत स्थिर होती है। ऐसे में कारोबार की आय में कमी और स्थिर लागत को वहन करने की इकाइयों की क्षमता में कमी से चालू वित्त वर्ष में निर्यातकों का परिचालन लाभ 250 से 300 आधार अंकों तक कम हो सकता है।”

क्रिसिल का अनुमान है कि घरेलू कारोबार में वृद्धि से पूरे चमड़ा उद्योग के परिचालन लाभ में गिरावट 1.5-2.0 प्रतिशत तक सीमित रह सकती है।

 

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