भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद पुनर्नियुक्ति की अनुशंसा, जनपद पंचायत आमला में पारदर्शिता पर सवाल

आमला: जनपद पंचायत आमला में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। दरअसल, जिस लेखापाल पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं, उसी को सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा संविदा पर नियुक्त करने की अनुशंसा कर दी गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता विक्रम बेले द्वारा लोकायुक्त में दर्ज शिकायत में तत्कालीन सीईओ दानिश खान और लेखापाल बबन कुमरे पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1), 13(2) तथा धारा 120-बी भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया था।

आरोप है कि दोनों ने मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग करते हुए राशि अपने निजी खातों में स्थानांतरित की थी।सूत्रों के मुताबिक, बाबू के सेवानिवृत्त होने से पहले ही यह शिकायत कलेक्टर और अपर कलेक्टर को सौंपी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जनपद सदस्यों ने भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे उक्त लेखापाल को दोबारा अवसर देने की अनुशंसा कर दी। इस निर्णय को लेकर जनपद के भीतर भी विरोध के स्वर उठ रहे हैं।

कुछ सदस्यों का कहना है कि प्रस्ताव पढ़ाए बिना ही हस्ताक्षर करा लिए गए थे।स्थानीय लोगों का मानना है कि यह निर्णय न केवल जांच की निष्पक्षता को प्रभावित करेगा बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही सरकारी मुहिम पर भी सवाल खड़े करता है।जनपद उपाध्यक्ष किशन रघुवंशी ने कहा, ऐसे भ्रष्ट बाबू के खिलाफ सभी सदस्य और अध्यक्ष मिलकर हटाने की बात पर चर्चा करेंगे। वहीं जनपद सीईओ पंकज दारोठिया का कहना है, हमारे पास अभी कोई पत्र नहीं आया है। यदि ऐसा कोई मामला आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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