
बेगमगंज। घने जंगलों के बीच बसा एक पावन स्थल, जहां आज भी शिव का वास है, यही है मंवई का सिद्धेश्वर धाम, जो वन परिक्षेत्र बेगमगंज की बीट मबई क्रमांक 86 में स्थित है।
यह स्थल प्रकृति की अनुपम सुंदरता का उदाहरण है। चारों ओर हरी-भरी हरियाली फैली है और बीचों-बीच पत्थरों के बीच से फूटता निर्मल जल साल भर लगातार बहता रहता है। चाहे भीषण गर्मी हो या सूखा, सिद्धेश्वर धाम का जलकुंड कभी सूखता नहीं। यही कारण है कि आसपास के जंगली जीव और पक्षी हमेशा स्वस्थ रहते हैं।
इस पावन स्थल को ईको-पर्यटन के रूप में विकसित करने और पहचान दिलाने में रायसेन वनमण्डल की डीएफओ श्रीमति प्रतिभा शुक्ला के मार्गदर्शन में रेंजर अरविंद अहिरवार ने विशेष प्रयास किए हैं। उनके नेतृत्व में यज्ञशाला का निर्माण, पहुंच मार्ग का विकास और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन किया गया। ग्रामीण भी वन जीवन की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
किवदंती है कि यह शिवधाम लगभग 500 साल पुराना है। यहां के जल में इतनी दिव्यता है कि मंवई गांव की 2500 की आबादी में गंभीर बीमारियाँ, टीवी या कैंसर जैसी समस्याएं कभी नहीं हुईं। ग्रामीणों का विश्वास है कि यह चमत्कार सिद्धेश्वर धाम के जल का ही है।
हर साल यहां भव्य मेला लगता है, जहां दूर-दूर से भक्त जल का आशीर्वाद लेने और बाबा सिद्धेश्वर के दर्शन करने आते हैं।
घने जंगलों के बीच यह कहानी न केवल आस्था की मिसाल है, बल्कि हरियाली, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुपम उदाहरण है।
