
नेतराम साहू पठारी। पठारी का यह क्षेत्र ऐतिहासिक धरोहरों, स्मारकों और सांस्कृतिक सम्पदाओं का खजाना समेटे हुए है, लेकिन आज ये धरोहरें बदहाली और असुरक्षा के साए में हैं. विभाग ने स्मारकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंप दी है, मगर एजेंसी के गार्ड ड्यूटी से गायब हैं. नतीजतन ये प्राचीन धरोहरें भगवान भरोसे टिकी हुई हैं. रामगढ़ की सप्तमड़िया गुफा तो पूरी तरह उपेक्षा का शिकार हो चुकी है, जिसकी सुरक्षा से विभाग ने लगभग हाथ खींच लिए हैं.
सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन स्मारकों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं. स्मारकों पर न पीने के पानी की व्यवस्था है, न बैठने की जगह, न जानकारी देने वाले साइन बोर्ड या गाइड. आसपास गंदगी और अव्यवस्था ने पर्यटकों का मन खराब कर दिया है.
विभागीय अभिलेखों के अनुसार, क्षेत्र में कुटकेश्वर महादेव मंदिर, देवल घाट महादेव मंदिर, सप्तमड़ियां बड़ोह, 16 खंबा बड़ोह और रामगढ़ की सतमड़िया जैसे पांच स्मारक संरक्षित हैं. ये मौर्य, गुप्त, गुर्जर-प्रतिहार और गौड़ साम्राज्य के काल की अद्भुत स्थापत्य कला और समृद्ध इतिहास का परिचय देते हैं. मगर लापरवाह विभागीय रवैये और ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते इन धरोहरों की शान फीकी पड़ रही है और पर्यटकों का रुझान घटता जा रहा है.
