
ग्वालियर चंबल डायरी हरीश दुबे। दतिया की सियासत में डॉ. नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती की अदावत पुरानी है। दोनों ही क्रमशः तीन और दो बार इस सीट से विधायक रह चुके हैं। दतिया सीट से सर्वाधिक लंबे समय तक विधायक बने रहने का रिकॉर्ड नरोत्तम के ही नाम दर्ज है। हालांकि राजेंद्र भारती के पिता श्याम सुंदर श्याम भी यहां से दो बार विधायक रहे। इस तरह पारिवारिक विरासत की बात की जाए तो भारती के परिवार के पास चार बार दतिया की विधायकी रही है। बहरहाल, यह पुनरावलोकन इसलिए कि भले ही इन दोनों नेताओं के बीच लंबी राजनीतिक दुश्मनी रही हो लेकिन भारती के चुनाव को हाल ही में एमपीएमएलए कोर्ट द्वारा निरस्त किए जाने के मामले में नरोत्तम कोई पार्टी नहीं थे, यह संबंधित बैंक प्रबंधन द्वारा की गई शिकायत के आधार पर हुई सुनवाई का नतीजा था लेकिन कोर्ट का निर्णय आने के कई दिनों बाद राजेंद्र भारती ने सारा ठीकरा नरोत्तम पर फोड दिया है। भारती का इल्जाम है कि नरोत्तम के खिलाफ वर्ष 2009 से जुड़े पेड न्यूज प्रकरण को वापस लेने के लिए उन पर लंबे समय से दबाव बनाया जाता रहा। बकौल भारती, मई 2024 में एक केंद्रीय मंत्री के ओएसडी के जरिए भी उन्हें संदेश भेजा गया, जिसमें भाजपा में शामिल होने, निगम-मंडल में अध्यक्ष पद दिलाने और आर्थिक नुकसान की भरपाई का प्रस्ताव दिया गया। सच्चाई यह है कि आरोप को साबित करने के लिए वे कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाए हैं। वे अभी भी यही कह रहे हैं कि उचित समय आने पर वे सबूत भी पेश कर देंगे। अपना चुनाव निरस्त होने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में भारती ने अपील कर रखी है, दतिया में फिलवक्त उपचुनाव होंगे अथवा नहीं, यह इस अपील पर सुनवाई उपरांत आने वाले न्यायिक दिशानिर्देश पर ही निर्भर है। यदि उपचुनाव की स्थिति बनती भी है तो भाजपा की तरफ से लगातार पांचवी बार नरोत्तम का चुनाव लड़ना तय है वहीं कांग्रेस में भारती के विकल्प के रूप में दतिया राजपरिवार के कुंवर घनश्याम सिंह का नाम उभर रहा है जो दतिया से दो बार विधायक रह चुके हैं,। वैसे दतिया कांग्रेस के दूसरी बार अध्यक्ष बने अशोक दांगी बगदा भी टिकट की दौड़ में हैं।
नियुक्तियों में सतीश की ही चली…
ग्वालियर कांग्रेस में भले ही विधायक सतीश सिकरवार और शहर सदर सुरेन्द्र यादव के बीच पटरी नहीं बैठ पा रही हो लेकिन यह सच है कि दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस के गलियारों में सतीश ने इस कदर पकड़ बनाई है कि वे जिला संगठन में भी मनचाही नियुक्तियां करा लेते हैं। पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग में जिलाध्यक्ष पद के लिए पहले योगेश दंडोतिया की नियुक्ति की खबर आई, इससे पहले कि योगेश जश्न मना पाते, उनका नाम कट गया। विधायक सतीश के खास समर्थक पार्षद केदार बराहदिया को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। नियुक्ति के साथ ही हटाए गए दंडोतिया का टेंशन मोड में आना स्वाभाविक था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर कुछ ऐसे गंभीर आरोप लगा दिए, जिनका उनके पास कोई सुबूत नहीं था। जब सुबूत मांगे गए तो जवाब था कि ऐसी चर्चा है। यह सच है कि मुख्य विपक्षी दल में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। काम नहीं करने वाले पदाधिकारियों पर अनुशासन का डंडा चला है। पद लेकर घर बैठे युवक कांग्रेस के नेताओं पर कार्रवाई हुई है। युवक कांग्रेस के नॉन परफॉर्मेंस पदाधिकारियों को होल्ड किया गया है। युवक कांग्रेस के कार्यक्रम और बैठकों में कई पदाधिकारी शामिल नहीं हो रहे हैं। पार्टी की इसी अंतर्कलह के चलते अभी तक जिला कार्यकारिणी घोषित नहीं हो सकी है।
रुक जाना नहीं, अभी और हैं मौके…
एमपी बोर्ड द्वारा आज घोषित परीक्षा नतीजे मिले जुले खुशी ग़म वाले रहे हैं। इस बार 10वीं का परिणाम पिछले साल की तुलना में कमजोर रहा, नतीजन ग्वालियर प्रदेश के निचले प्रदर्शन वाले जिलों में शामिल हो गया है। जबकि 12वीं का नतीजा पिछले साल की तुलना में बेहतर रहा है। बहरहाल, ग्वालियर के बच्चों ने हर बार की तरह इस बार भी दमखम दिखाया है। ग्वालियर के अनमोल गोयल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में चौथा स्थान हासिल किया जबकि ग्वालियर की ही गौरी शर्मा ने 12वीं क्लास में पीसीएम संकाय में प्रदेश में दूसरी व ग्वालियर में टॉपर की रैंक हासिल कर गालव नगरी का मान बढ़ाया है। किन्हीं कारणों से परीक्षा में असफल रहे छात्रों के लिए हमारा यही संदेश, उदास होकर रुक जाना नहीं, बोर्ड उन्हें अपनी टैलेंट साबित करने फिर से मौका देने जा रहा है।
