भोपाल। राज्य शासन ने आज स्पष्ट किया कि उसके संज्ञान में आया है कि कुछ शरारती तत्व सोशल मीडिया पर यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि ओबीसी आरक्षण मामले में उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत मध्यप्रदेश सरकार के हलफनामे का हिस्सा कुछ वायरल टिप्पणियां हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि यह सामग्री न तो शासन के हलफनामे में है और न ही किसी स्वीकृत नीति अथवा निर्णय का हिस्सा है। वस्तुतः यह सामग्री 1980 में गठित राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (महाजन आयोग) की 1983 में प्रस्तुत अंतिम रिपोर्ट का भाग है, जिसे पूर्व में उच्च न्यायालय और अब सर्वोच्च न्यायालय के अभिलेखों में भी रखा गया है। शासन ने कहा कि महाजन आयोग ने 35% आरक्षण की अनुशंसा की थी, जबकि राज्य शासन ने 27% आरक्षण लागू किया है। यह दर्शाता है कि वर्तमान निर्णय आयोग की रिपोर्ट पर आधारित नहीं है। शासन ने सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार को निंदनीय बताते हुए कहा है कि मामले की गंभीर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार सामाजिक सद्भाव और सबके विकास के प्रति प्रतिबद्ध है।
