अष्टभुजी खोंगरा: आस्था, तपस्या और चमत्कार का प्राचीन धाम

राधौगढ़। अष्टभुजी खोंगरा की प्राचीन वादियों में स्थित अष्टभुजी मैया का मंदिर आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। करीब 300 वर्ष पुराना यह स्थल संत–महापुरुषों की तपस्या और त्याग की गाथाओं से जुड़ा हुआ है। यहां प्राचीन बावड़ी, समाधि स्थल और चरण पादुका चैकी जैसे धार्मिक प्रतीक आज भी श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराते हैं।

माना जाता है कि पश्चिम मुखी पहाड़ी पर अष्टभुजी मैया, दक्षिण मुखी पहाड़ी पर श्री हनुमान जी और पूर्व मुखी पहाड़ी पर भोलेनाथ विराजमान हैं। लोककथाओं के अनुसार, बीते समय में यहां रात्री के समय शेर तक माता के दर्शन और बावड़ी से जल ग्रहण करने आता था।

त्याग और भक्ति की इस धरती पर हर वर्ष नवरात्रि में मेर समाज सहित स्थानीय समितियां अखंड ज्योति प्रज्वलित कर रामचरितमानस पाठ और विशेष अनुष्ठानों के साथ उत्सव मनाती हैं। यही कारण है कि अष्टभुजी खोंगरा आज भी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करने वाले सिद्ध स्थल के रूप में प्रसिद्ध है।

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