मुंबई, 28 जुलाई (वार्ता) सोनी सब के पौराणिक धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे कलाकार मनीष वाधवा और जीतेन लालवानी ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु-शिष्य संबंधों और जीवन मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।यह धारावाहिक पांडवों और कौरवों के बचपन, उनके संस्कारों, रिश्तों और मार्गदर्शन की कहानी को दर्शाता है, जिसने आगे चलकर हस्तिनापुर के भविष्य को आकार दिया। शो में भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य युवा राजकुमारों के मार्गदर्शक के रूप में दिखाई देते हैं।
भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने कहा कि वह बच्चों को हमेशा अपने बचपन का आनंद लेने, मेहनत करने और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने की सलाह देते हैं। उन्होंने कहा, “मैं बच्चों से कहता हूं कि अच्छे या बुरे कमेंट्स से प्रभावित न हों। अच्छे कमेंट्स अहंकार ला सकते हैं और बुरे कमेंट्स निराशा। जरूरी यह है कि वे अपने काम का आनंद लें और पूरी लगन से अपना सर्वश्रेष्ठ दें।”
उन्होंने कहा कि कलाकारों को अपने किरदार में पूरी तरह ढलना चाहिए, लेकिन अपनी वास्तविक पहचान कभी नहीं खोनी चाहिए। साथ ही उन्होंने स्वीकार किया कि वह स्वयं भी बच्चों से नई बातें सीखते रहते हैं।
द्रोणाचार्य की भूमिका निभा रहे जीतेन लालवानी ने कहा कि बच्चे सबसे अधिक तब सीखते हैं जब वे अपने आसपास सहज महसूस करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं पहले उनका दोस्त बनने की कोशिश करता हूं। हम बातचीत करते हैं, हंसते हैं और साथ समय बिताते हैं। जब भी वे कोई सवाल पूछते हैं, मैं अपने अनुभव साझा करता हूं। मेरा मानना है कि मार्गदर्शन स्वाभाविक होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि कभी अभिनय, कभी अनुशासन और कभी काम का आनंद लेने जैसे विषयों पर चर्चा होती है। जीतेन ने कहा कि युवा कलाकार बेहद प्रतिभाशाली हैं और उन्हें मार्गदर्शन देने के साथ-साथ वह स्वयं भी उनसे प्रतिदिन कुछ न कुछ सीखते हैं। उल्लेखनीय है कि ‘हस्तिनापुर के वीर’ का प्रसारण सोनी सब पर सोमवार से शनिवार रात नौ बजे किया जाता है।

