
ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर आईआरबाईबी के अनुसार, बातचीत में “पश्चिम एशिया में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त पहलों” पर भी विचार किया गया। जाएगा। श्री घलीबाफ का यह दौरा इलाके के लिए एक संवेदनशील समय पर हो रहा है। सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच कार्ययोजना समझौता बिना किसी समाधान के खत्म हो गयी, जिससे ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक प्रयासों में फिर से अनिश्चितता पैदा हो गई है।
फरवरी में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से श्री घलीबाफ ने ईरान के कूटनीतिक प्रयासों में अहम भूमिका निभाई है और कई दौर की बातचीत में मुख्य वार्ताकार रहे हैं। इराक का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि इराक अपनी सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखते हुए ईरान, अमेरिका और इलाके के अन्य देशों के बीच चल रहे बड़े टकराव से निपटने की कोशिश कर रहा है। ईरानी प्रतिनिधिमंडल की इराकी अधिकारियों के साथ बातचीत में सीमा सुरक्षा और आतंकवाद-विरोधी सहयोग के साथ-साथ मौजूदा आपसी समझौतों को लागू करने और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
यह दौरा ईरान और इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र के बीच हालिया विवाद के बाद हो रहा है। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार के प्रधानमंत्री मसरूर बरज़ानी ने सोमवार को ईरान पर उनके कार्यालय और कुर्द खुफिया एजेंसी ‘परास्टिन’ के प्रमुख के आवास को निशाना बनाकर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया। ईरान ने इस आरोप से इनकार किया और कहा कि यह घटना एक “फॉल्स फ्लैग” अभियान (किसी और पर दोष मढ़ने के लिए किया गया अभियान) हो सकता है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है
जब होर्मुज जलडमरूमध्य भारी दबाव में है और अमेरिका-ईरान के बीच व्यापक टकराव के कारण इस रणनीतिक जलमार्ग से होने वाले व्यापारिक परिवहन में भारी कमी आई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अलग से कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही की व्यवस्था को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत “पूरी गंभीरता” से जारी है, हालांकि उन्होंने कहा कि “इस प्रक्रिया पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रहे कई पक्षों” के कारण समझौते तक पहुँचने में देरी हुई है।
