
मुंबई, 03 अक्टूबर (वार्ता) निर्देशक अभिषेक पाठक ने ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के जरिए थ्रिलर फिल्मों में अपनी अलग पहचान मजबूत की है। ‘दृश्यम 2′ के बाद इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म में उन्होंने निर्देशक और सह-लेखक के तौर पर कहानी को नया रूप देने की कोशिश की है।’दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की खासियत यह रही है कि दर्शक कहानी के हर सुराग और मोड़ को बारीकी से परखते हैं।
‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में पाठक ने दर्शकों की इस अपेक्षा को ध्यान में रखते हुए कहानी और स्क्रीनप्ले को इस तरह पेश किया है कि घटनाक्रम लगातार अनुमान लगाने के लिए प्रेरित करता है।
फिल्म की हिंदी कहानी मलयालम की तीसरी फिल्म से अलग बतायी गयी है। फ्रेंचाइजी की स्थापित दुनिया को बरकरार रखते हुए कहानी को नया रूप देना पाठक के लिए रचनात्मक चुनौती थी।
फिल्म को शुरुआती स्तर पर दर्शकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। अभिषेक पाठक ने ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी में स्थापित फॉर्मूले को दोहराने के बजाय कहानी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ के जरिए उन्होंने थ्रिलर जॉनर में अपनी निर्देशन शैली को और मजबूत किया है।
