नई दिल्ली: भारत में जहाँ अधिकतर सरकारी और निजी दफ्तरों में 5-डे वर्क वीक चलता है, वहीं अब कर्मचारी 4-डे वर्क वीक की उम्मीद लगाए बैठे हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने नए लेबर कोड्स को लेकर स्पष्ट किया है कि इसमें 4-दिन काम और 3-दिन छुट्टी के विकल्प से इनकार नहीं किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि यह पूरी तरह से नियोक्ता और कर्मचारी के बीच आपसी सहमति पर निर्भर करेगा। यदि कर्मचारी चाहे तो वह सप्ताह के 4 दिन, रोजाना 12 घंटे काम करके बाकी 3 दिन की पेड छुट्टी ले सकता है।
सरकार ने साफ किया है कि नए नियमों के तहत साप्ताहिक कार्य समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है और अधिकतम 48 घंटे काम करने की सीमा तय है। यदि कोई कर्मचारी 4-डे वर्क वीक चुनता है, तो उसे 48 घंटे पूरे करने के लिए प्रतिदिन 12 घंटे काम करना होगा। नए लेबर कोड्स में यह प्रावधान है कि यदि कंपनी कर्मचारी से इस तय सीमा से ज्यादा काम कराती है, तो उसे ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना होगा। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के शोषण को रोकना और काम-जीवन संतुलन को बेहतर बनाना है।
21 नवंबर 2025 को लागू किए गए नए लेबर कोड्स में 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित किया गया है। इन कोड्स में फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएँ मिलेंगी और वे सिर्फ एक साल की सेवा में ग्रेच्युटी के हकदार होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार कानूनी पहचान दी गई है। कंपनियों को इनके वेलफेयर फंड में योगदान देना होगा, जिससे असंगठित क्षेत्र के इन कर्मचारियों को भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल सकेगा।

