पिता की जगह बेटे को 30 घंटे हिरासत में रखने पर हाईकोर्ट सख्त

इंदौर: शहर में पॉक्सो एक्ट के एक मामले में चंदन नगर पुलिस की कार्यप्रणाली कटघरे में है. आरोप है कि नाबालिग से शारीरिक शोषण के आरोपी रियल एस्टेट कारोबारी को पकड़ने के बजाय पुलिस ने उसके इंजीनियर बेटे को अवैधानिक रूप से करीब 30 घंटे थाने में बैठाए रखा. इस दौरान उसे हथकड़ी भी पहनाई गई, जबकि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और न ही वह आरोपी है. हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए चंदन नगर थाना प्रभारी को 4 दिसंबर को संबंधित अवधि के सीसीटीवी फुटेज सहित तलब किया है.
एक नाबालिग लड़की की शिकायत पर पुलिस ने 12 नवंबर को रियल एस्टेट कारोबारी 62 वर्षीय संजय दुबे के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया था. पुलिस अब तक आरोपी का पता नहीं लगा सकी. आरोप है कि दबाव बनाने के लिए पुलिसकर्मियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का बताकर 27 नवंबर की रात संजय के 32 वर्षीय इंजीनियर बेटे राजा को हिरासत में ले लिया और लगभग डेढ़ दिन थाने में बैठाए रखा. परिजनों का आरोप है कि हिरासत के दौरान राजा को हथकड़ी लगाई गई और प्रताड़ित किया.

परिवार पहुंचा हाईकोर्ट, पेश किए फोटो और वीडियो
इस पर राजा के साले आकाश तिवारी ने एडवोकेट नीरज सोनी के माध्यम से 28 नवंबर को हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की और पुलिस कमिश्नर को भी शिकायत भेजी. दुबे परिवार ने थाने में राजा को बैठाए रखने और हथकड़ी लगाए जाने के फोटो-वीडियो जुटाए, जिन्हें हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया. कानूनी तौर पर किसी व्यक्ति को पूछताछ के नाम पर लंबे समय तक हिरासत में रखना प्रतिबंधित है और यदि वह आरोपी हो तो 24 घंटे में कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है. परिवार का दावा है कि चंदन नगर पुलिस ने इन प्रावधानों का उल्लंघन किया.

हाईकोर्ट में सुनवाई की भनक लगते ही छोड़ दिया
28 नवंबर को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में हुई पहली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को केस की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए. इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने राजा को रिहा कर दिया. 2 दिसंबर को हुई अगली सुनवाई में जांच अधिकारी संध्या निगम कोर्ट में हाजिर हुईं.

कोर्ट ने पूछा कि पूछताछ के नाम पर किसी व्यक्ति को 30 घंटे तक कैसे बैठाए रखा जा सकता है. इस पर उन्होंने कहा कि वे उस दिन अवकाश पर थीं और विस्तृत जवाब थाना प्रभारी ही दे सकते हैं. कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी को 4 दिसंबर को पेश होकर पूरे 30 घंटों के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को भी इसे सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं

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