सतना: लोकायुक्त द्वारा राज्य शासन के अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले तो कई बार सामने आ चुके हैं. लेकिन सेंट्रल जीएसटी के निरीक्षक को उसके कार्यालय में ही घूस लेते हुए दबोचने की घटना पहली बार सामने आई है. लोकायुक्त रीवा की 10 सदस्यीय टीम ने सीजीएसटी निरीक्षक को 20 हजार रु की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकडऩे के बाद उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की.
लोकायुक्त संभाग रीवा के प्रभारी पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने जानकारी देते हुए बताया कि वीरेंद्र कुमार शर्मा पिता कोदू प्रसाद उम्र 33 वर्ष निवासी राजेंद्र नगर सतना द्वारा 29 नवंबर को शिकायत की गई थी.लोकायुक्त रीवा को सौंपे गए अपने शिकायती आवेदन में वीरेंद्र द्वारा इस बात का उल्लेख किया गया कि जिले के मझगवां क्षेत्र में स्थित फर्म कैलाशराज ट्रैक्टर्स का ई-वे बिल की पेनाल्टी न लगाने और छापा न डालने के एवज 60 हजार रु की रिश्वत मांगी जा रही है.
यह रिश्वत कोई नहीं बल्कि केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग प्रभाग सतना की निवारक शाखा में बतौर निरीक्षक पदस्थ कुमार सौरभ द्वारा मांगी जा रही है. शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसपी लोकायुक्त द्वारा सत्यापन कराया गया. सत्यापन में शिकायत की पुष्टि होने पर सीजीएसटी के निरीक्षक को रंगे हाथ पकडऩे की व्यूह रचना तैयारी की जाने लगी.
निर्धारित योजना के अनुसार शिकायतकत्र्ता वीरेंद्र पाउडर लगे हुए 20 हजार लेकर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग प्रभाग सतना कार्यालय में पहुंच गए. सीजीएसटी निरीक्षक कुमार सौरभ को जैसे ही रिश्वत की रकम सौंपने के बाद वीरेंद्र ने इशारा किया. वैसे ही पहले से तैयार 10 सदस्यीय लोकायुक्त टीम ने निरीक्षक को दबोच लिया. हलांकि कार्रवाई होती देख पहले तो जीएसटी निरीक्षक ने अपने केंद्रीय कर्मचारी होने का रुआब गांठने का प्रयास किया.
लेकिन लोकायुक्त टीम के सख्त रवैऐ को देखते हुए कुछ ही देर में जीएसटी निरीक्षक अपना चेहरा छिपाने के लिए मजबूर हो गया. रंगे हाथ दबोचने के बाद लोकायुक्त की टीम आगे की कार्रवाई के लिए आरोपी निरीक्षक को सर्किट हाउस में ले आई. जहां के कक्ष क्र. 2 में उससे पूछताछ करने के साथ ही प्रकरण से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य एकत्रित किए गए. जिसके बाद आरोपी निरीक्षक के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई की गई.
कार्रवाई से मचा हडक़ंच
बाहर से किसी अभेद्य किले की तरह नजर आने वाले सेंट्रल जीएसटी कार्यालय में धड़ाधड़ प्रवेश करते हुए लोकायुक्त रीवा की टीम ने जैसे ही सीजीएसटी निरीक्षक को दबोचा वैसे ही कार्यालय के भीतर हडक़ंप मच गया. कार्यालय में पदस्थ कुछ ऐसे कर्मचारी जो टैक्स सेटलमेंट के नाम पर खुले आम रिश्वत मांगते सुने जाते थे, कार्रवाई को देख वे भी सकते में आ गए. हलांकि कार्यालय के भीतर अपने सहकर्मी के विरुद्ध कार्रवाई होती देख कुछ कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप करने के लिए कहा. लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी ने उचित दूरी बनाए रखने में ही अपनी भलाई समझी.
दिखाई 7 लाख की धौंस
सीजीएसटी निरीक्षक कुमार सौरभ और शिकायतकत्र्ता वीरेंद्र के बीच व्हाट्सएप चैट में लेन-देन का स्पष्ट उल्लेख है. जिसमें टैक्सेबल सप्लाई का 18 फीसदी, 60 फीसदी ब्याज और पेनाल्टी को जोडक़र एक साल का 7 लाख रु का हिसाब बना दिया गया. वहीं कार्रवाई से बचने के लिए पहले 70 हजार मांगे गए. जिसे वीरेंद्र के निवेदन पर घटाकर 60 हजार कर दिया गया. गौरतलब है कि सीजीएसटी निरीक्षक कुमार सौरभ के अधिकार क्षेत्र में प्रिवेंटिव के अंतर्गत धारा 64 और 74 के केस आते थे. बताया गया कि अनैतिक तरीके से दबाव बनाकर अवैध वसूली की कार्यशैली के चलते कई कारोबारी सीजीएसटी निरीक्षक से खासे परेशान थे. लेकिन वे खुलकर शिकायत करने से डरते थे. ट्रैप कार्रवाई की जानकारी सामने आने पर कई कारोबारियों ने संतुष्टि जाहिर की
