छतरपुर: जिले में अवैध कॉलोनाइजरों का खेल लगातार जारी है। प्रशासन की कार्रवाई सीमित होने के कारण भू-माफिया खुलेआम खेतों को प्लॉटिंग कर बेच रहे हैं और लोग इनके जाल में फंस रहे हैं। अब तक जिले में 223 अवैध कॉलोनियों की पहचान की जा चुकी है, लेकिन इनमें से केवल 50 पर ही जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लग सकी है।
सबसे ज्यादा अवैध कॉलोनियां छतरपुर (84) और खजुराहो (69) में पाई गई हैं, फिर भी यहां प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई। बताया जाता है कि कॉलोनाइजरों की पकड़ एसडीएम और तहसील कार्यालयों तक इतनी मजबूत है कि अधिकारियों के आदेश भी अमल में नहीं आते। बगौता मौजा में शासकीय भूमि पर प्लॉटिंग करने वालों पर तहसीलदार ने बेदखली और जुर्माने का आदेश दिया था, लेकिन आज तक उस पर कार्रवाई नहीं हो सकी।
विशेषज्ञों का कहना है कि खसरे के कॉलम-12 में कैफियत दर्ज होते ही खरीद-फरोख्त रोक दी जानी चाहिए और एफआईआर दर्ज करना भी एसडीएम के अधिकार में है, मगर अफसर कार्रवाई से बचते रहे। वहीं रजिस्ट्रार कार्यालय की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों पर रजिस्ट्री जारी रहने का आरोप है।
कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने चेतावनी दी है कि बिना अनुमति कॉलोनियां विकसित करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। उनके निर्देश के बाद लोगों को उम्मीद है कि भू-माफियाओं पर शिकंजा कस सकेगा।
