नयी दिल्ली, 20 सितंबर (वार्ता) अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा की फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी से शुक्रवार को अमेरिका में भारतीय आईटी और बैंकिंग कंपनियों के शेयर गिर गये।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एच-1बी वीजा का शुल्क बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने संबंधी आदेश पर हस्ताक्षर किये। उस समय तक भारत में शेयर बाजार बंद हो चुके थे, लेकिन अमेरिका में भारतीय आईटी और बैंकिंग कंपनियों पर उसका असर देखा गया।
नैसडेक में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों कॉग्निजेंट का शेयर 4.73 प्रतिशत लुढ़क गया। इंफोसिस में 3.41 प्रतिशत और विप्रो में 2.10 प्रतिशत की गिरावट रही। सिफी टेक्नोलॉजीज का शेयर 0.17 प्रतिशत टूट गया। एचडीएफसी बैंक का शेयर 0.48 फीसद और आईसीआईसीआई बैंक का 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस आदेश का सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर देखा जायेगा क्योंकि एच1 बी वीजा पाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। अमेरिकी वित्त वर्ष 2024 (30 सितंबर को समाप्त) में करीब दो लाख सात हजार भारतीयों को एच-1बी वीजा जारी किया गया।
अमेरिका के 30 जून 2025 तक के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वहां एच-1बी वीजा पर काम करने वालों में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) के अमेरिका में 5,505 कर्मचारी एच-1बी वीजा पर हैं जो अमेरिकी कंपनी अमेजन (10,044 कर्मचारी) के बाद एच-1बी वीजा इस्तेमाल कर रही सबसे बड़ी कंपनी है। माइक्रोसॉफ्ट और मेटा में भी पांच हजार से अधिक कर्मचारी एच-1बी वीजा पर काम कर रहे हैं। एप्पल और गूगल दोनों में करीब 4200- 4,200 और कॉग्निजेंट में 2,493 कर्मचारी एच-1बी वीजा पर हैं। इसके बाद जे.पी. मॉर्गन, वॉल-मार्ट और डेलॉइट का स्थान हैं।
वीजा के नये शुल्क वॉशिंगटन में स्थानीय समय के अनुसार, शनिवार-रविवार की आधी रात से लागू हो जायेंगे। पुराने नियम के तहत एच-1बी वीजा की लॉटरी में शामिल होने के लिए 215 डॉलर का शुल्क अदा करना पड़ता था। लॉटरी में नाम आने के बाद नियोक्ता कंपनी को फॉर्म आई-129 भरने के लिए 780 डॉलर का शुल्क देना होता था। इसके बाद, वीजा शुल्क कंपनी के आकार, कर्मचारियों की संख्या आदि पर निर्भर करती थी। अब वीजा शुल्क बढ़ाकर सीधे एक लाख डॉलर कर दिया गया है।

