नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जनता से ऊंचे मुनाफ़े का झांसा देकर निवेश कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है तथा इस घोटाले की राशि लगभग 2700 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अपर आयुक्त, आर्थिक अपराध शाखा, अमृता गूगुलोथ ने आज बताया कि इस सिलसिले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। नवीनतम कार्रवाई में जुगल किशोर नामक आरोपी को पकड़ा गया है जबकि इसके दो साथी सुभाष बिजारणिया और ओमेंद्र बिजारणिया पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं।
इन तीनों पर देशभर में लगभग 150 मुक़दमे दर्ज हैं, जिनमें सर्वाधिक मामले राजस्थान में हैं। कुल घोटाले की राशि लगभग 2700 करोड़ रुपये आंकी गई है।
पीड़ितों की ओर से करावल नगर निवासी नेहा कुमारी समेत 98 निवेशकों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि नैक्सा एवरग्रीन प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के संचालकों ने धोलेरा, अहमदाबाद, गुजरात में ज़मीन दिलाने और हर सप्ताह तय मुनाफ़ा देने का वादा किया था। आरोपियों ने निवेशकों को बरगलाने के लिए प्रधानमंत्री के वीडियो दिखाकर यह झूठ फैलाया कि वे इस परियोजना के ‘ब्रांड एम्बेसड’ हैं।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने मोबाइल ऐप के ज़रिये हज़ारों लोगों से निवेश कराए और शुरू में हर मंगलवार को तीन प्रतिशत ब्याज देकर विश्वास बनाया। इसके बाद ऐप को बंद कर दिया गया और कंपनी के दफ़्तर सील कर दिए गए। ज़्यादातर पीड़ित सरकारी कर्मचारी बताए जाते हैं। समूह ने धोलेरा क्षेत्र में लगभग 1200 बीघा ज़मीन ख़रीदी थी, जिनमें से 168 एकड़ का सत्यापन हो चुका है। लेकिन भारी धनराशि अन्य कंपनियों और निजी खातों में ग़बन कर ली गई।
नवीनतम गिरफ़्तार आरोपी शाहदरा निवासी जुगल किशोर शर्मा (57) पुजारी और संपत्ति दलाल के रूप में काम करता था तथा केवल पांचवीं कक्षा तक शिक्षित है। उसने मुख्य आरोपियों के साथ मिलकर विश्वास नगर क्षेत्र में दफ़्तर खोला और निवेशकों से धन इकट्ठा किया।
आर्थिक अपराध शाखा ने आम जनता को चेतावनी दी है कि ऊंचे मुनाफ़े का लालच देने वाली किसी भी कंपनी के झांसे में न आएं और निवेश से पहले यह सुनिश्चित करें कि संबंधित कंपनी या संस्था आरओसी, सेबी, आरबीआई अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण में विधिवत पंजीकृत हो।
