नयी दिल्ली, 11 सितंबर (वार्ता) दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक खतरनाक आईएसआईएस आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है, जो पाकिस्तान आधारित हैंडलर के निर्देश पर भारत में “खिलाफत” स्थापित करने और “गजवा-ए-हिंद” के तहत जिहाद छेड़ने की साजिश रच रहा था।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रमोद सिंह कुशवाहा ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली, झारखंड, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के ठाणे, निजामाबाद और राजगढ़ में छापेमारी कर पांच मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान अशहर दानिश (रांची), आफताब अंसारी (मुंबई), सुफियान अबुबकर खान (झारखंड), मोहम्मद हुजैफा यमन (तेलंगाना) और कामरान कुरैशी (मध्य प्रदेश) के रूप में हुयी है। इस ऑपरेशन में कुल 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से छह को राजस्थान के भिवाड़ी में हथियार प्रशिक्षण लेते पकड़ा गया।
मॉड्यूल का मास्टरमाइंड अशहर दानिश, जो रांची से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर है, वह पाकिस्तानी हैंडलर के संपर्क में था। वह “सीईओ”, “गजबा लीडर” और “प्रोफेसर” जैसे कोडवर्ड्स का उपयोग करता था। पुलिस ने रांची के इस्लामनगर और तबारक लॉज से दानिश को गिरफ्तार किया, जहां से सल्फर पाउडर, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, बॉल बेयरिंग, एक देशी पिस्तौल, कारतूस, लैपटॉप, मोबाइल फोन, नकदी और दिल्ली के कुछ क्षेत्रों के नक्शे बरामद हुए। ये सामग्री बारूद और विस्फोटक उपकरण (आईईडी) बनाने में उपयोगी थी। इसके अलावा, एके-47 राइफल, रिवॉल्वर, हथगोले, सर्किट बोर्ड, तांबे की चादरें, फ्यूज पॉइंट, गैस मास्क और पीएच टेस्टर भी जब्त किए गए।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि यह मॉड्यूल स्लीपर सेल की तरह काम करता था। इसके सदस्य सिग्नल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर से संवाद करते थे। वे सोशल मीडिया पर “गजवा-ए-हिंद” नामक ऑनलाइन समूह चलाते थे, जिसके माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाया जाता था और उन्हें भर्ती किया जाता था। इस मॉड्यूल का उद्देश्य साम्प्रदायिक तनाव फैलाना और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ना था।
जांच में पता चला कि यह मॉड्यूल अल-कायदा और आईएसआईएस से प्रेरित था। इसके सदस्य अरावली पहाड़ियों के जंगलों में हथियार प्रशिक्षण ले रहे थे और त्योहारी सीजन में दिल्ली-एनसीआर में बड़े हमले की योजना बना रहे थे। दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आफताब और सुफियान को गिरफ्तार किया गया, जो हथियारों की व्यवस्था कर मुंबई भागने की फिराक में थे। आफताब दसवीं पास है।
पुलिस ने दिल्ली, रांची, ठाणे, निजामाबाद, राजगढ़ और पलामू सहित 12 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की। बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच चल रही है ताकि नेटवर्क के अन्य सदस्यों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का पता लगाया जा सके। केंद्रीय एजेंसियां, जिनमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और खुफिया ब्यूरो (आईबी) शामिल हैं, इस साजिश की गहराई की जांच कर रही हैं।
श्री कुशवाहा ने बताया कि पिछले छह महीनों से इस मॉड्यूल पर नजर रखी जा रही थी। समय रहते इन आतंकियों को पकड़कर एक बड़ी साजिश को नाकाम किया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मॉड्यूल ने कितने लोगों को भर्ती किया और उनके संभावित लक्ष्य क्या थे। जांच अभी जारी है, और भविष्य में अतिरिक्त गिरफ्तारियां भी संभावित हैं।
