
ब्यावरा।नवभारत का प्रतिवर्ष होने वाला वैचारिक आयोजन इस वर्ष अद्भुत और अनूठा होगा. इस वर्ष पर्यावरण पर केंद्रित विषय पर जिनका व्याख्यान होना है उनके विचारों से एक-एक श्रोता सोचने व अपना चिंतन विस्तृत करने को विवश होगा.
13 सितंबर को दोपहर 3 बजे से परंपरागत रूप से होने वाला ‘विचार मंथन’ होगा और इसी मंच पर रात्रि 8 बजे काव्य निशा होगी. ‘नवभारत’ का यह सतत् 26 वां सौपान है.
इस वर्ष मुख्य वक्ता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रख्यात प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ राजेन्द्र सिंह अलवर राजस्थान से ब्यावरा आ रहे है. उन्हें देश-विदेश में ‘जलपुरुष’ अथवा वाटरमैन ऑफ इंडिया के रुप में जाना जाता है. वे विचार मंथन के विषय – ‘प्रकृति विरूद्ध विकास की होड़ और दुनिया पर गहराते संकट के बादल’ पर अपना प्रभावी व्याख्यान देंगे.
उनके साथ ही तीन अन्य विद्वान वक्ता भी आ रहे है. इन सभी विद्वान वक्ताओं का प्रकृति, पर्यावरण पर कार्य करने का गहरा अनुभव, अध्ययन और संघर्षशील व्यक्तित्व है. इन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के लिये अपनप सब कुछ दांव पर लगा दिया है.
डॉ राजेन्द्र सिंह ने अपने 50 वर्षों के जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन और उन्मूलन के सफल अनुभवों को बांटकर, प्रकृति और मानवता को सम्मान देने का प्रेरणादायी काम किया है. आपकी प्रेरणा से कई युवाओं में पानी और प्रकृति का चिंतन बढ़ा है. वे लालची विकास से हटकर प्रकृति पुनर्जनन के कार्यों में जुटे हुए हैं.
आपने 1500 से अधिक गांवों को पानीदार बनाया. देश की 14 नदियों को पुनर्जीवित किया है. इन्ही कार्यों का प्रभाव है कि 10600 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, अनुकूलन और उन्मूलन में सफलता प्राप्त कर दुनिया के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है. 21वीं सदी में ये उजडे, बेपानी समाज और नदियों को पानीदार बनाने का काम कर रहे है.
दूसरे वक्ता के रूप में वरिष्ठ पत्रकार ह्रदयेश जोशी नई दिल्ली से आ रहे है. श्री जोशी की पर्यावरण के बिगड़ते स्वरूप की चिंता करने, जलवायु परिवर्तन के दूरगामी परिणामों से सचेत करने और प्रकृति के प्रति जवाबदेही निभाने वाली सख्शियत के रूप में पहचान है.
तीसरे वक्ता के रूप में पद्मश्री बाबूलाल दाहिया पिथौराबाद (सतना) मप्र से आ रहे है.
82 वर्षीय श्री दाहिया को जैव विविधता और अनाज के देशी बीजों के संरक्षण संवर्धन को लेकर भारत सरकार ने वर्ष 2019 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया है. आप शिक्षा, कृषि, जैव विविधता, आदिवासी लोककला, आकाशवाणी से जुड़ी मप्र स्तर की विभिन्न समितियों के सदस्य है. एक और वक्ता के रूप में खण्डवा के वरिष्ठ पत्रकारजय नागड़ा आ रहे है. उनका पत्रकारिता क्षेत्र में 34 वर्षो का प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का लंबा अनुभव है. श्री नागड़ा की पहचान भी पर्यावरण प्रेमी पत्रकार के रूप में है.
