न्यायालय के बार बार के आदेश को भी नहीं मान रहा है चुनाव आयोग : कांग्रेस

नयी दिल्ली, 08 सितम्बर (वार्ता) कांग्रेस ने कहा है कि आधार को मतदाता के पहचान के प्रमाण के तौर पर एक दस्तावेज मानने के उच्चतम न्यायालय के बार बार के आदेश को चुनाव आयोग मानने के लिए तैयार नहीं जो एक गैरजिम्मेदाराना और शर्मनाक हरकत है।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोमवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि आधार को चुनाव का अधिकार पाने के लिए पहचान का दस्तावेज मानने का उच्चतम न्यायालय तीसरी बार निर्देश दे चुका है लेकिन चुनाव आयोग न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं है।

श्री रमेश ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने के निर्देश का चुनाव आयोग पालन नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश का पालन जरूरी है।

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि न्यायालय ने तीसरी बार कहा है कि आधार को वोटर पंजीकरण के लिए एक वैध पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए लेकिन बार बार की हिदायत को आयोग नकार रहा है।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग बार-बार ऐसी बाधाएँ पैदा कर रहा है जिनसे वैध मतदाताओं के पंजीकरण में असुविधा पैदा हो रही है। आयोग ने राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ स्तर के एजेंट-बीएलओ को भी मान्यता देने से इनकार कर दिया है। आधार को वोट देने के दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने से मना कर रहा है। अधिकारी भी इस बारे में नोटिस जारी कह रहे हैं कि केवल वही दस्तावेज़ स्वीकार किए जाएँगे जो आयोग ने तय किए हैं।

उन्होंने कहा “यह गड़बड़ी पूरी तरह चुनाव आयोग की बनाई हुई है। चुनाव के करीब होने पर भी विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण कराने की माँग किसी ने नहीं की थी और इसे इतने अव्यवस्थित तरीके से कराने की माँग भी किसी ने नहीं की- जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट को बुनियादी जाँच-पड़ताल और संतुलन सुनिश्चित करने के लिए दखल देना पड़ा है।”

श्री रमेश ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि कांग्रेस सत्तारूढ़ शासन के विरुद्ध चुनाव लड़ रहे है।

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