
मुंबई, 02 सितंबर 2025: आज शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 6 पैसे कमजोर होकर 88.16 के स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट विदेशी फंड की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूत मांग के कारण हुई है। सोमवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 88.33 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, हालांकि बाद में 88.10 पर आकर बंद हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, अमेरिकी टैरिफ नीतियों और विदेशी निवेश प्रवाह पर भारतीय मुद्रा की दिशा निर्भर करेगी।
रुपये में कमजोरी के कारण
रुपये की इस कमजोरी के कई कारण हैं, जिनमें विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालना एक प्रमुख वजह है। इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। भारत के व्यापार घाटे में वृद्धि भी रुपये की गिरावट का एक बड़ा कारण है, क्योंकि आयात के लिए ज्यादा डॉलर की जरूरत पड़ती है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
रुपये में आई इस गिरावट का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। आयातित वस्तुएं, जैसे कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी, महंगी हो जाएंगी। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे परिवहन लागत और महंगाई में और बढ़ोतरी होगी। विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों का बजट भी प्रभावित होगा। हालांकि, निर्यातकों को इसका फायदा मिल सकता है, क्योंकि उनके उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते हो जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये की गिरावट को थामने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।
