
खिलचीपुर। सिविल अस्पताल में एक महिला का मोबाइल की टॉर्च जलाकर इलाज करना पड़ा। उसे गंभीर हालत में लाया गया था। उस समय बिजली भी गुल थी। महिला डॉक्टर ने आधे घंटे तक सीपीआर भी दिया। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। खिलचीपुर। इमली स्टैंड की रहने वाली समीना बी (45) को तेज बुखार और घबराहट की शिकायत पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। यहां पहुंचने पर बिजली जाने के बाद भी बैकअप सिस्टम का उपयोग नहीं किया गया। जबकि अस्पताल में दो जनरेटर, बड़ा यूपीएस इन्वर्टर सिस्टम लगा है।
वार्ड में बिजली न होने से न पंखे चले, न ही पर्याप्त रोशनी मिली। नतीजा यह रहा कि मरीज के परिजन खुद हाथ से पंखा करते रहे। ड्रिप लगाने के लिए मोबाइल की टॉर्च जलाकर नर्स को सहयोग करना पड़ा। डॉ. सुमित सिंगी ने तत्काल पहुंचकर महिला का उपचार शुरू किया और सीपीआर भी दिया। करीब 25-30 मिनट तक लगातार कोशिशें की गईं, लेकिन महिला को नहीं बचाया जा सका।
खिलचीपुर वार्ड नंबर 13 में रहने वाले हमीद मंसूरी (55) मज़दूरी का काम करते हैं। वह आसपास के गांवों में बच्चों के खाने के लिए कुरकुरे बेचने जाते हैं। उनके दो बेटे हैं- बड़ा बेटा इमरान मंसूरी (25) और छोटा बेटा समीर (20)। समीरा बी (45) की मौत के बाद घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। पड़ोसियों ने बताया कि समीरा बी की तबीयत पिछले 3-4 दिन से खराब चल रही थी। उन्हें बुखार था और डॉक्टर ने टाइफाइड बताया था, जिसका इलाज भी चल रहा था।
इन्वर्टर की बैटरियां खराब
खिलचीपुर अस्पताल के अंदर बने इलेक्ट्रॉनिक रूम में लाखों रुपए का यूपीएस इन्वर्टर तो लगा हुआ है, लेकिन उसमें बैटरियां नहीं हैं। इलेक्ट्रीशियन ने बताया कि यूपीएस इन्वर्टर की 12 वोल्ट की 9 बैटरियां खराब हो गई हैं। सभी बैटरियां गारंटी पीरियड में हैं, जिन्हें एक्सचेंज के लिए भोपाल भेजा गया है। इलेक्ट्रीशियन ने बताया कि अस्पताल परिसर में लगा जनरेटर की बैटरी में कार्बन आ गया था। पता चलने पर कार्बन हटाकर जनरेटर को चालू कर दिया था।
