गांधीनगर, (वार्ता) गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बुधवार को कहा कि ग्लोबल वॉर्मिंग विश्व की सबसे बड़ी समस्या बनी है। हाल में बढ़ती जा रही बीमारियों के बीच शुद्ध भोजन, शुद्ध हवा तथा शुद्ध पानी हमारी जरूरत बने हैं।
श्री देवव्रत ने कहा, लोगों का स्वास्थ्य एवं प्रकृति की रक्षा करने का एकमात्र उपाय है प्राकृतिक कृषि। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के आग्रह से राज्य के सभी जिला कलेक्टरों तथा जिला विकास अधिकारियों को गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्राकृतिक फार्म की मुलाकात पर ले जाया गया था, जिसके फलस्वरूप राज्य में प्राकृतिक कृषि अभियान तेजी से आगे बढ़ा है।
राज्य में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए राज्यपाल की अध्यक्षता में तथा मुख्यमंत्री श्री पटेल एवं कृषि मंत्री राघवजीभाई पटेल की उपस्थिति में आज राज्य के सभी महानगर पालिका आयुक्तों, जिला कलेक्टरों तथा जिला विकास अधिकारियों की सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से वर्चुअल बैठक आयोजित हुई।
इस अवसर पर जैविक ऑर्गेनिक खेती तथा प्राकृतिक खेती दोनों के बिलकुल भिन्न होने का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऑर्गेनिक खेती में खर्च कम नहीं होता, मेहनत कम नहीं होती और उत्पादन भी नहीं बढ़ता है, जबकि प्राकृतिक खेती में कम खर्च से अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है और स्वास्थ्यप्रद उत्पादन मिलता है।
हाल ही में गुजरात के चार कृषि विश्वविद्यालयों में से जूनागढ, आणंद एवं दांतीवाडा कृषि विश्वविद्यालयों की रिपोर्ट में साबित हुआ है कि यदि प्राकृतिक कृषि पाँच आयामों के साथ की जाए, तो पहले वर्ष से ही उत्पादन रासायिनक खेती जितना ही होता है। रासायनिक खेती में खर्च अधिक होता है, जबकि प्राकृतिक कृषि में नहीं के बराबर खर्च होने से किसानों को अधिक लाभ होता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश भर में प्राकृतिक कृषि का दायरा बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की शुरुआत की है। तब यह हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि इस मिशन के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें की अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक कृषि को अपनाएं।
राज्यपाल ने जिला स्तर पर सभी महानगर पालिका आयुक्तों, जिला कलेक्टरों और जिला विकास अधिकारियों से किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने हेतु अधिक से अधिक बिक्री बाजार स्थापित करने की अपील की। उन्होंने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि श्री पटेल द्वारा शुरू किए गए बिजली बचाओ अभियान के अंतर्गत हम सभी को मिलकर प्रयास कर बिजली बचाने में योगदान देना चाहिए।
बिजली बचाने की आदत से पर्यावरण भी बचेगा और जरूरतमंदों को पर्याप्त बिजली भी मिलेगी। यदि हम सूर्योदय से कुछ समय पहले स्ट्रीट लाइटें बंद करके और सूर्योदय के तुरंत बाद स्ट्रीट लाइट को शुरू करके प्रतिदिन एक घंटे के लिए भी बिजली बचाएंगे, तो हम करोड़ों रुपये की बचत कर सकते हैं। इसके उपरांत ऑफिस में हों तभी ही उपकरणों का उपयोग करें।
