सिंगरौली: जियावन थाना क्षेत्र के ग्राम कटौली निवासी प्रिंस द्विवेदी पिता स्व. विशेश्वर द्विवेदी उम्र 20 वर्ष ने 8 अगस्त को फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया था। मृतक के परिजनों का आरोप था कि प्रिंस को धमकाने, उसकाने एवं प्रताड़ना के चलते यह खौफनाक कदम उठाया था। परिजनों के रिपोर्ट पर पुलिस ने जांच पड़ताल की और आरोपी सही पाये जाने पर आरोपी राजेश कुमार दुबे एवं अनीश कुमार दुबे के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर गिरफ्तार कर लिया गया है।
जियावन पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार प्रिंस द्विवेदी के सोसाईड के मामले में परिनजों के रिपोर्ट एवं वायरल ऑडियों के आधार पर कई लोगों से पूछतांछ की गई। साथ ही घटना स्थल का निरीक्षण भी किया गया। इस दौरान पीएम रिपोर्ट से आदि से पाया गया कि राजेश द्विवेदी, अनीश द्विवेदी, विष्णु द्विवेदी तीनों सगे भाई। मृतक प्रिंस के परिवार के हैं। वर्ष 2022 में विष्णु द्विवेदी राजेश द्विवेदी को मारा था।
जिसमें राजेश का पैर टूट गया था। मृतक का परिवारिक संबंध अच्छा होने के कारण राजेश व अनीश के द्वारा मृतक प्रिंस पर आरोप लगाया गया कि विष्णु द्विवेदी से राजेश द्विवेदी को मरवाया गया है। पुलिस ने आगे बताया कि राजेश द्विवेदी के द्वारा दवाई का खर्चा 3 लाख रूपये मृतक प्रिंस को देने का दबाव उक्त लोग डालने लगे। पैसा न देने के कारण राजेश द्विवेदी व अनीश द्वारा मृतक प्रिंस व उसकी मॉ से आये दिन रास्ता रोककर घर में लगे बिजली तार कनेक्सन को काट कर मारपीट करते हुये जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
घटना के दो दिन पूर्व 6 अगस्त को राजेश ने मृतक के प्रिंस द्विवेदी के साथ बिजली के तार काट ेदेने पर मारपीट की गई थी। जिसकी रिपोर्ट थाने में की गई थी। पुलिस ने आगे बताया कि उक्त दोनों आरोपियों ने प्रताड़ित कर पैसे की मांग कर रहे थे। जिसके चलते प्रिंस ने यह खौफनाक कदम उठाया है। पुलिस ने आरोपी राजेश द्विवेदी एवं अनीश द्विवेदी के विरूद्ध प्रथम दृष्टिया में अपराध पाये जाने पर बीएनएस की धारा 115(2),351(2),3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करते हुये न्यायालय मेें पेश किया गया। जहां से जेल भेज दिया गया। उक्त कार्रवाई में टीआई डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह, एसआई अज्ञलाल वर्मा, एएसआई तेजबहादुर सिंह, नरेन्द्र सिंह, प्रआर गुलाब सिंह, आर अमित कुमार, बबलू यादव, दिनेश कुमार, सदन कुमार, खुम सिंह, बृजेन्द्र सिंह एवं सौरव जायसवाल का योगदान सराहनीय रहा।
