सीधी: शहर और राष्ट्रीय राजमार्गों पर गौवंश की मौजूदगी लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। शासन-प्रशासन द्वारा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी होने के बावजूद प्रभावी कदम न उठाए जाने से हालात जस के तस बने हुए हैं। सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर यह मुद्दा बहस का केंद्र जरूर है, लेकिन स्थायी समाधान आज भी अधूरा है।
आवारा मवेशी जहां यातायात को बाधित करते हैं, वहीं रात में दुर्घटनाओं का बड़ा कारण भी बनते हैं। हर वर्ष सैकड़ों लोग इन हादसों में अपनी जान गवां रहे हैं और अनेक घायल हो रहे हैं। सीधी-रीवा व सीधी-सिंगरौली मार्ग समेत अन्य व्यस्ततम सड़कों पर गौवंश का जमावड़ा आम दृश्य है। पशुपालकों की लापरवाही, गौशालाओं की कमी और प्रशासनिक उदासीनता समस्या को और गंभीर बना रही है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत पशुपालकों पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप से आदेश का कठोर पालन नहीं हो पा रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि नगरीय निकाय और समाजसेवियों की सहभागिता से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
