रायसेन:भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं को दिन रात अंतिम आकार देने में मूर्तिकार जुटे हुए हैं। दरअसल 27 अगस्त बुधवार को गणेश चतुर्थी को स्थापना होने से खरीददार इन प्रतिमाओं को लेने पहुंचने लगेंगे। नगर में आधा दर्जन स्थानों गंजबाजार, पाटनदेव, अर्जुन नगर दशहरा मैदान रोड़ रामलीला मैदान पर मूर्तिकार लखन चक्रवर्ती ,विशाल चक्रवर्ती, सुनील महोबिया गोविंद चक्रवर्ती विभिन्न आकारों और अलग-अलग मुद्राओं में लंबोदर की प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
इस बार बड़ी प्रतिमाएं आर्डर पर और मांग के आधार पर करीब 100 के आसपास ही बनाई जा रही हैं।जबकि छोटी प्रतिमाएं एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर प्रजापति समाज के मूर्तिकार अपने आवासों पर ही तैयार कर रहे हैं।मूर्तिकार विशाल चक्रवर्ती ने बताया कि हमारे यहां 12 से15 फ़ीट ऊंची गणेश प्रतिमाओं के ऑर्डर बुक हैं।उनके यहां श्रीराम दरबार के साथ गिरजनन्दन गणेश, भगवान शंकर सूर्यदेवता के साथ लंबोदर वीणा वादन करते हुए गणेश की मूर्ति आकर्षण का केंद्र है।
दस दिवसीय गणेश उत्सव के पर्व के दौरान ज्यादातर श्रद्धालु अपने घरों में छोटी प्रतिमाएं ही स्थापित करते हैं। इससे उनकी मांग और बिक्री अधिक रहती है। जबकि बड़ी प्रतिमाएं सिर्फ आर्डर पर तैयार होती हैं।
छोटी प्रतिमाओं को बिक्री अधिक: नगर में श्री गणेश पर्व पर सार्वजनिक पंडाल बहुत कम स्थानों पर लगाए जाते हैं। पंडित राममोहन चतुर्वेदी मुकेश भार्गव संतोष शास्त्री ने बताया नगर में जहां पंडाल लगाए भी जाते हैं, वो परंपरा का निर्वाहन करने प्रतीकात्मक ही होते हैं। कहीं कहीं प्रतिष्ठानों और घरों में भी बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। दरअसल बड़ी प्रतिमाओं की स्थापना विधि विधान से होती है।
पूजन भी विधान अनुसार होती है। इससे घरों में छोटी चल प्रतिमाएं श्रद्वालु स्थापित करते हैं। इससे छोटी प्रतिमाओं की ज्यादा बिक्री और मांग होती है।मुहूर्त में पूजन करने का महत्व: पंडित उपेंद्र शुक्ला के अनुसार श्री गणेश मूलाधार शक्ति हैं। शरीर में रीढ़ की हड्डी में मूलाधार चक्र होता है। मूलाधार चक्र ठीक नहीं होगा तो कोई कार्य ठीक नहीं होगा। इसलिए प्रत्येक धार्मिक कार्य श्री गणेश पूजन के साथ किया जाता है। इसी के साथ गणपति की लंबी सूंड में उच्चाटन होती है।
