
इंदौर. मध्यप्रदेश शासन के आदेश के बाद इंदौर शहर में पहली बार किसी देहदानी को राजकीय सम्मान दिया. 269, जवाहर मार्ग निवासी स्व. अशोक वर्मा के देहदान अवसर पर स्थानीय प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया. परिजन और समाजजन ने इस निर्णय पर शासन व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार जताया.
वर्मा का शनिवार रात निधन हुआ था, 2011 में उन्होंने महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति इंदौर के माध्यम से देहदान का संकल्प लिया था. निधन उपरांत परिजनों ने नेत्रदान, त्वचादान एवं देहदान की सूचना संस्था को दी. तकनीकी कारणों से नेत्रदान व त्वचादान संभव नहीं हो पाया, लेकिन रविवार सुबह उनकी पार्थिव देह अंतिम यात्रा के बाद अरविंदो मेडिकल कॉलेज को समर्पित की गई. सरल स्वभाव और प्रगतिशील विचारधारा के धनी रहे श्री वर्मा लंबे समय से संस्था से जुड़े थे. उन्होंने अपनी दवाई की दुकान पर बड़ा पोस्टर लगाकर नागरिकों को देहदान के लिए प्रेरित किया और अनेक लोगों से संकल्प पत्र भरवाए. कुछ वर्ष पूर्व असमय निधन हुए अपने पुत्र का भी उन्होंने देहदान किया था. इतना ही नहीं, सामाजिक दृष्टि से उन्होंने अपनी पुत्रवधू का बेटी की तरह पुनर्विवाह भी कराया था. इस अवसर पर समिति संस्थापक नंदकिशोर व्यास ने श्रद्धांजलि अर्पित की. संस्था के सदस्यों और परिजनों ने शासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर की व्यवस्था को ऐतिहासिक कदम बताते हुए इसे समाज में जागरूकता का प्रेरक बताया. उल्लेखनीय है कि महर्षि दधीचि देहदान अंगदान समिति इंदौर प्रदेश की पहली संस्था है, जो पिछले दो दशकों से रैली, शिविर और सेमिनार के जरिए अंगदान-देहदान के प्रति जनजागरूकता फैला रही है. समिति अब तक 20 सम्मान समारोह आयोजित कर करीब 260 देहदानी-अंगदानी परिवारों को “महर्षि दधीचि सम्मान” से सम्मानित कर चुकी है.
