102 शासकीय स्कूल शिक्षक विहीन तो 5 सौ में सिर्फ एक या दो ही शिक्षक

जबलपुर: प्रदेश के डिंडौरी जिले के शासकीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है। दरअसल हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में आरोप है कि जिले के 102 शासकीय स्कूल शिक्षक विहीन है, जबकि 499 स्कूलों में सिर्फ एक या दो ही शिक्षक पदस्थ है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले को संजीदगी से लेते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

युगलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को निर्धारित की है।यह जनहित का मामला डिंडौरी निवासी लोक सिंह की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता राहुल देशमुख ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि डिंडौरी जिले के शासकीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर अस्तित्वहीन है। क्योकि जिले के 102 शासकीय स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है तो वहीं शेष अन्य 499 स्कूलों में एक या दो ही शिक्षक पदस्थ है।

आवेदक की ओर से कहा गया कि जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं तो बच्चों की पढ़ाई कैसे संभव है, जिनसे उनका भविष्य अंधकारमय है। इतना ही नहीं राईट-टू-एजुकेशन एक्ट का भी उल्लंघन है। क्योकि उक्त एक्ट के तहत बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रावधान है। मामले में प्रमुख सचिव आदिवासी कल्याण मंत्रालय, आयुक्त आदिवासी कल्याण विभाग भोपाल व डिंडौरी कलेक्टर को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

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