पुष्पेन्द्र वैद्य
इंदौर:देश में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के मामले में पन्ना शीर्ष पर रहा है. इस गंभीर स्थिति में सुधार लाने के लिए जिले की शाहनगर ग्राम पंचायत ने एक अनूठा नवाचार शुरू किया है. जिला पंचायत की पहल पर यहाँ ‘पोषण बैंक’ स्थापित किया गया है, जिसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं को घर-घर जाकर पौष्टिक आहार की टोकरी दी जा रही है, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें.जिला पंचायत के सीईओ उमराव सिंह मरावी की इस पहल के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं.
शाहनगर के मॉडल को देखकर जिले की अन्य पंचायतें भी इसे अपना रही हैं. आने वाले समय में इस अभियान के बेहतर नतीजे की उम्मीद है. शाहनगर में गर्भवती महिलाओं को न केवल पौष्टिक आहार दिया जाता है, बल्कि उन्हें संस्थागत प्रसव के लिए भी प्रेरित किया जाता है. शुरुआती महीनों में पंचायत कर्मी घर-घर जाकर महिलाओं को सुपोषण की टोकरी देते हैं और उसका महत्व बताते हैं.
इसके बाद सप्ताह में एक बार पंचायत भवन से यह सामग्री दी जाती है. पोषण टोकरी में फलों के अलावा अनाज, दाने, आयरन की गोलियाँ आदि शामिल होता है. इस कार्य के लिए पंचायत ने विशेष बजट स्वीकृत किया है, जबकि सीईओ स्वयं इसकी निगरानी कर रहे हैं. संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एक निःशुल्क वाहन भी उपलब्ध कराया गया है. इन प्रयासों से सुरक्षित प्रसव की दर में वृद्धि और मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आ रही है.
बेहतर नतीजों से हम आशान्वित
‘हमारी कोशिश है कि पन्ना जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में स्पष्ट कमी आए. शाहनगर पंचायत में शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट अब अन्य पंचायतों तक पहुँच रहा है. बेहतर नतीजों से हम आशान्वित हैं और इसे जिले की सभी पंचायतों में लागू करेंगे.’
उमराव सिंह मरावी, सीईओ, जिला पंचायत, पन्ना
गाँधी के सपनों का गाँव- आत्मनिर्भरता की मिसाल बना शाहनगर हीरे उगलने वाले पन्ना जिले की धरती पर बसा लगभग 7,800 की आबादी वाला शाहनगर गाँव आज समग्र विकास का प्रतीक है. मात्र तीन वर्षों में इस पंचायत ने अपनी आमदनी को चार गुना बढ़ाते हुए आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी है. सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं से लेकर स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और सामाजिक उत्थान तक- हर क्षेत्र में नए आयाम स्थापित हो रहे हैं.
पंचायत भवन अब किसी कॉर्पोरेट ऑफिस जैसा व्यवस्थित है, जहाँ विभागवार काउंटर, कर्मचारियों का ड्रेस कोड और 22 निजी नियुक्तियाँ हैं, जिससे रोज़गार भी बढ़ा है. पहले वीरान रहने वाला परिसर अब दुधिया रोशनी और रंगीन फव्वारों से जगमगाता है. पंचायत ने प्लास्टिक और नशामुक्ति अभियान चलाकर अपराध पर अंकुश लगाया है. शिक्षा के क्षेत्र में जनपुस्तकालय की स्थापना, प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पुनः पढ़ाई के लिए प्रेरित करना महत्वपूर्ण कदम रहे हैं. स्वच्छता में भी शाहनगर अग्रणी है. पारदर्शिता के लिए पंचायत चौपाल में सोशल ऑडिट की व्यवस्था है.
किसी परिवार में शोक की स्थिति में ‘सरपंच अंत्येष्टि सहायता राशि’ के तहत तत्काल एक हजार रुपये दिए जाते हैं. तीन वर्ष पहले पंचायत की वार्षिक आय करीब 19 लाख रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 30 लाख रुपये हो गई. इस राशि से सड़क, बिजली, पानी और सौंदर्यीकरण की 10 बड़ी योजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं, जबकि कई कार्य प्रगति पर हैं. सीईओ उमराव सिंह मरावी के अनुसार, शाहनगर पंचायत ने जिस तरह वित्तीय संसाधनों का सृजन और उपयोग किया है, वह पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत है. यहाँ का विकास केवल ढाँचागत नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक उत्थान का संतुलित उदाहरण है. सरपंच मनोज जैन ‘शीरु’ कहते हैं- हमारा लक्ष्य है कि हर ग्रामीण को बुनियादी सुविधाओं के साथ गरिमामय जीवन मिले. यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं, पूरे शाहनगर की टीम की मेहनत का नतीजा है
