800 करोड़ की 35 हैक्टेयर जमीन की अगले हफ्ते होगी अंतिम सुनवाई
हाई कोर्ट से एनटीसी को मिला है स्टे, जिला प्रशासन बना रहा शहर विकास की योजना
उज्जैन: वर्षों पूर्व बंद हो चुकी हीरा मिल की जमीन अब जिला प्रशासन को मिलने का लगभग रास्ता साफ हो गया है, एक हफ्ते बाद हाई कोर्ट में फिर सुनवाई होगी.नवभारत से चर्चा में एसडीएम एलन गर्ग ने बताया कि लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व हीरा मिल की जमीन जिला प्रशासन ने सरकारी घोषित की थी। ऐसे में नेशनल टैक्सटाइल कॉरपोरेशन (एनटीसी) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी ,जिसको लेकर लगातार सुनवाई का दौर चल रहा है.
हीरा मिल की जमीन पर एक नजर
हीरा मिल जब उज्जैन में चलती थी तो यहां पर हजारों मजदूर काम करते थे, यह 35.926 हेक्टेयर पूरी जमीन है. जिसकी कीमत आज लगभग 800 करोड रुपए है। पूर्व अपर कलेक्टर मृणाल मीणा ने उक्त जमीन सरकारी घोषित कर दी थी.
सैकड़ों लोग कर रहे निवास
बंद पड़ी इस हीरा मिल की जमीन पर अवैध निर्माण भी हो गए हैं. जब हीरा मिल चलती थी तो कर्मचारी-मजदूरों के लिए मकान बने थे, उनमें से कई तो इधर-उधर चले गए, कुछ लोग मर गए, बाकी उनके रिश्तेदार और किराएदार रह रहे हैं. ऐसे में लगभग 800 से ज्यादा लोग हैं, जो हीरा मिल की जमीन को सरकारी होने पर विरोध भी जता रहे हैं.
1928 में चालू 2002 में हीरा मिल बंद
एसडीएम एल एन गर्ग ने बताया कि हीरा मिल को यह जमीन जिला प्रशासन ने उसे दौरान लीज पर दी थी, 1928 से लेकर इसका संचालन वर्षों तक चलता रहा. 4000 से ज्यादा श्रमिक काम करते थे, जिसमें कपड़ा बनता था विदेश में निर्यात होता था, राजा बहादुर सेठ ने इसका संचालन प्रारंभ किया था, 1974 में भारत सरकार ने गजट नोटिफिकेशन किया तो सारी संपत्तियां एनटीसी की हो गई, तब यही हीरा मिल का संचालन करने लगे. 2002 में हीरा मिल बंद हो गई.
एन टी सी ने मांगा समय, कोर्ट ने लगाई फटकार
हाई कोर्ट में बुधवार को हीरा मिल की जमीन के संबंध में सुनवाई हुई, जिसमें एनटीसी को जवाब पेश करना था, ऐसे में एनटीसी की तरफ से एक बार फिर समय मांगा गया, तो हाईकोर्ट ने फटकार लगाई की काफी समय दे चुके हैं. अगली सुनवाई एक हफ्ते बाद होगी उसमें जवाब पेश करना होगा अन्यथा फाइनल सुनवाई कर फैसला दे दिया जाएगा
