
वाशिंगटन, 24 मई (वार्ता) अमेरिका ने सूडान पर नए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों द्वारा एक औपचारिक निष्कर्ष निकाला गया है कि सूडान ने 2024 में देश में चल रहे गृहयुद्ध के दौरान रासायनिक हथियारों का उपयोग किया था, जिसके बाद विश्व के के सबसे विनाशकारी संघर्षों में से एक पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।
विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने कहा,“24 अप्रैल, 2025 को, अमेरिका ने रासायनिक और जैविक हथियार नियंत्रण और युद्ध उन्मूलन अधिनियम 1991 के अंतर्गत निर्धारित किया कि सूडानी सरकार ने 2024 में रासायनिक हथियारों का उपयोग किया था।” उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध छह जून के आसपास प्रभावी हो सकते हैं, जिनमें अमेरिकी निर्यात और सूडान को सरकार समर्थित ऋण पर प्रतिबंध शामिल होंगे।
इस निष्कर्ष में यह भी पाया गया कि सूडान ने रासायनिक हथियार सम्मेलन (सी.डब्ल्यू.सी.) का उल्लंघन किया, जिस पर उसने हस्ताक्षर किया है।
बीबीसी ने सुश्री ब्रूस के हवाले से कहा,“अमेरिका ने सूडानी सरकार से सभी रासायनिक हथियारों का उपयोग बंद करने और सीडब्ल्यूसी के अंतर्गत अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया है। अमेरिका हथियारों के प्रसार को बढ़ावा देने वालों को जवाबदेह ठहराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
अमेरिकी अधिकारियों ने हालांकि सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि किस रासायनिक हथियार का उपयोग किया गया, लेकिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहले कहा था कि दूरदराज के इलाकों में दो अलग-अलग हमलों में क्लोरीन गैस का कथित उपयोग हुआ था लेकिन ये दावे अभी तक सत्यापित नहीं हुए हैं।
सूडान की सरकार ने आरोपों का जोरदार खंडन किया है। संस्कृति एवं सूचना मंत्री खालिद अल-अयसिर ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे राजनीतिक ब्लैकमेल, एक मनगढ़ंत कहानी, अंतरराष्ट्रीय विचार को गुमराह करने वाला और सूडानी लोगों के खिलाफ अपराधों में शामिल अवैध लोगों को कवर प्रदान करने वाला करार दिया। उन्होंने सूडान के अल-शिफा औषधि संयंत्र पर 1998 के विवादास्पद अमेरिकी मिसाइल हमले का भी उल्लेख किया, जिसकी बाद में विश्वसनीय साक्ष्यों के अभाव में व्यापक आलोचना हुई थी।
ये प्रतिबंध सूडानी सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच अप्रैल 2023 से चल रहे क्रूर गृहयुद्ध के बीच लगाए गए हैं। इस संघर्ष में 1,50,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 1.2 करोड़ से ज़्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं और देश मानवीय संकट में फंसा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2.5 करोड़ सूडानी नागरिकों को तत्काल खाद्य सहायता की आवश्यकता है।
सूडानी सेना ने हालांकि हाल ही में घोषणा किया था कि राजधानी और प्रमुख सरकारी स्थलों पर पुनः कब्ज़ा करने के बाद खार्तूम राज्य पूरी तरह से विद्रोहियों से मुक्त हो चुका है, लेकिन ओमदुरमान और पोर्ट सूडान जैसे क्षेत्रों में लड़ाई जारी है।
सूडान ने संयुक्त अरब अमीरात पर आरएसएफ का समर्थन करने का आरोप लगाया है, जिसमें पोर्ट सूडान हमले की जिम्मेदारी भी शामिल है जबकि यूएई ने इन दावों को निराधार बताकर खारिज कर दिया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है, हाल ही में सूडान ने संयुक्त अरब अमीरात पर नरसंहार का मुकदमा चलाने का प्रयास किया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र की एक अदालत ने खारिज कर दिया था।
अमेरिका पहले भी दोनों युद्धरत गुटों पर प्रतिबंध लगा चुका है। जनवरी में, जनरल अब्देल फत्ताह अल-बुरहान पर सूडान के लोकतांत्रिक परिवर्तन को कमज़ोर करने का आरोप लगा, जबकि आरएसएफ नेता मोहम्मद हमदान डागालो (हेमेदती) पर पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नरसंहार करने का आरोप लगाया लेकिन दोनों ही आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण सूडान की अर्थव्यवस्था पहले से ही चरमरा रही है और विश्लेषकों का मानना है कि नए उपायों का तत्काल प्रभाव सीमित हो सकता है। बहरहाल, ट्म्प प्रशासन इस बात पर बल दे रहा है और एक स्पष्ट संदेश दे रहा है “रासायनिक हथियारों का उपयोग अस्वीकार्य है और इसे दंडित किया जाएगा।”
