नई दिल्ली। 23 दिसंबर, 2025। भारतीय राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार पर एक गंभीर आरोप लगाया। ब्रिटास का दावा है कि सरकार भारतीय करेंसी नोटों से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने की एक ‘गुप्त योजना’ पर काम कर रही है। उनका आरोप है कि उच्च स्तर पर चल रही इन चर्चाओं का उद्देश्य बापू की तस्वीर को भारत की अन्य सांस्कृतिक विरासतों और प्रतीकों से बदलना है। यह दावा ऐसे समय में आया है जब पहले से ही मनरेगा (MGNREGA) का नाम बदलने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है।
जॉन ब्रिटास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह महज कोई सामान्य अटकल नहीं है, बल्कि देश के राष्ट्रीय प्रतीकों को फिर से लिखने की एक सोची-समझी कोशिश है। उनके अनुसार, सरकार गांधी जी के प्रभाव को धीरे-धीरे कम करने के लिए विभिन्न योजनाओं से उनका नाम हटा रही है और अब नोटों की बारी है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) पूर्व में ऐसे किसी भी प्रस्ताव से स्पष्ट रूप से इनकार कर चुका है। साल 2022 में भी जब अन्य महापुरुषों की तस्वीरें नोटों पर लगाने की खबरें उड़ी थीं, तब सेंट्रल बैंक ने आधिकारिक बयान जारी कर बापू की तस्वीर को स्थायी बताया था।
इस विवाद में राजनीति का तड़का तब और बढ़ गया जब ब्रिटास ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के प्रधानमंत्री की टी-पार्टी में शामिल होने पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र पर धब्बा’ बताते हुए कहा कि एक तरफ जनविरोधी नीतियां लाई जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का नरम रुख उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। ब्रिटास ने तंज कसते हुए कहा कि शायद नोटों से गांधी जी की तस्वीर हटने के बाद भी विपक्ष के नेता ऐसे स्वागत समारोहों का हिस्सा बनते रहेंगे। फिलहाल, इस पूरे दावे ने देश की अर्थव्यवस्था और पहचान से जुड़े इस विषय पर नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।

