समितियों के खाते में राशि, किसान भुगतान से वंचित

जबलपुर:धान उपार्जन के दौरान घोषित 15 रूपये प्रति क्विंटल प्रासंगिक व्यय की राशि समितियों और संकुल स्तरीय संगठनों के खातों में पहुंचने की जानकारी सामने आई है, लेकिन 50 दिन बाद भी किसानों के खातों में भुगतान नहीं हुआ है। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।विदित है कि धान उपार्जन प्रक्रिया समाप्त हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है। उपार्जन अवधि के दौरान किसानों को राहत देने के उद्देश्य से 15 रूपये प्रति क्विंटल प्रासंगिक व्यय देने की घोषणा की गई थी।

उस समय इसे बड़ी राहत के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका लाभ अब तक किसानों को नहीं मिल पाया है। कई किसानों ने भुगतान की उम्मीद में अपने स्तर पर संभावित राशि का आकलन भी कर लिया था, लेकिन अब तक एक भी रुपया खाते में न आने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है। जब तक किसानों के खातों में राशि नहीं पहुंचती है, 15 रूपये प्रति क्विंटल का यह वादा अधूरा ही माना जाएगा।
समितियों के खातों में करोड़ों जमा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपार्जन कार्य में लगी सहकारी समितियों और संकुल स्तरीय संगठनों के खातों में करोड़ों रुपये जमा हो चुके हैं। इसके विपरीत जिन किसानों के नाम पर यह राहत घोषित की गई थी, वे अब भी भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिसके कारण भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे। किसानों का कहना है कि यदि राशि जारी हो चुकी है तो फिर उनके खातों तक पहुंचने में देरी क्यों हो रही है। यदि घोषणा केवल असंतोष शांत करने के लिए की गई थी, तो यह उनके साथ अन्याय है।
1000 की सीमा ने बढ़ाया असंतोष
15 रूपये प्रति क्विंटल भुगतान के साथ अधिकतम 1000 की सीमा तय की गई थी। इसका मतलब है कि 67 क्विंटल से अधिक धान बेचने वाले किसानों को अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा। इस सीमा की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे कई किसानों को बाद में इसकी जानकारी मिली। इससे उनमें असंतोष और बढ़ गया है। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से अब तक कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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