इंदौर: स्वतंत्रता दिवस पर शहर की सेंट्रल और जिला जेल के 20 कैदियों के लिए भी आजादी की सुबह लेकर आएगी. हत्या, गंभीर मारपीट और अन्य संगीन अपराधों में दोषी ठहराए गए ये कैदी लंबे समय से आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे. अच्छे आचरण और शासन द्वारा तय मानकों पर खरे उतरने के बाद इन्हें रिहाई का मौका मिला है.
जेल प्रशासन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 15 अगस्त को इस बार सेंट्रल जेल से 11 कैदी रिहा होंगे, जिनमें 10 पुरुष और एक महिला शामिल है, जबकि जिला जेल से रिहा होने वाले 9 कैदी सभी पुरुष हैं. इनमें से कई 14 से 20 साल तक सलाखों के पीछे रह चुके हैं. रिहा होने वाले अधिकांश कैदियों ने जेल में रहते हुए शिक्षा पूरी की, व्यावसायिक प्रशिक्षण लिया और धार्मिक-सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहकर सुधार का उदाहरण पेश किया है.
जेल सूत्रों का कहना है कि पहले आजीवन कैदियों की रिहाई केवल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर होती थी, लेकिन अब साल में पांच बार ऐसे कैदियों को रिहा करने की नीति लागू की गई है. उद्देश्य है कि सुधार की राह पर चलने वालों को समाज में दोबारा सम्मानजनक जीवन जीने का अधिक अवसर दिया जाए. जेल अधीक्षक का कहना है कि रिहा होने वालों को समाज में पुनः स्थापित होने के लिए जरूरी परामर्श और मार्गदर्शन दिया जाएगा. जेल प्रशासन का मानना है कि यह रिहाई केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का संदेश भी है जो दिखाती है कि अपनी गलतियों से सबक लेने वालों को कानून भी दूसरा मौका देता है.
