मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
भारतीय जन संघ से जनता पार्टी फिर टूटकर पृथक पार्टी बनी भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी का नाम भी है. और उन्हीं की सियासी जमीन पर उनके पुत्र दीपक जोशी ने भी एक बार बागली विधानसभा से एवं एक बार हाटपिपलिया विधानसभा से जीत कर परंपरागत जमीन को बचाए रखा, लेकिन कमलनाथ सरकार के विद्रोह के समय ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस के कई विधायक भारतीय जनता पार्टी में आ गए. इस खेल में दीपक जोशी की परंपरागत सीट हाटपिपलिया उनके हाथ से चली गई और बागली सुरक्षित होने की वजह से पहले से ही छिन गई थी.
हाटपिपलिया में कांग्रेस से जीतकर विधानसभा पहुंचे मनोज चौधरी उपचुनाव में भाजपा से जीतकर विधानसभा पहुंचे. उस समय भारतीय जनता पार्टी की मजबूरी थी कि भाजपा सरकार बनने में मददगार रहे इन ंिसंधिया समर्थक विधायक को टिकट देना. सो दीपक जोशी के लाख जतन पर भी उप चुनाव में वे टिकट न पा सके. समय के साथ पार्टी में सम्मान नहीं मिलने के कारण दीपक जोशी ने विगत 2023 के चुनाव में कांग्रेस का दामन थाम लिया. भाजपा में रहते क्षेत्र की बची खुची सामान्य सीट कन्नौद-खातेगांव विधानसभा सीट जिस पर दीपक जोशी की दाल गल सकती थी, पर अपने पैर पर कुलहाड़ी मारते हुए इस सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ लिया और बुरी तरह हार गए.
सरकार बनाना तो दूर प्रदेश में कांग्रेस पहले से और पिछड़ गई. ऐसे में दीपक जोशी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे थे मौका देखकर बड़े नेताओं का हवाला देकर फिर से भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. पूर्व शिक्षा मंत्री रह चुके दीपक जोशी को पार्टी में रही अपने पिता की साख और महत्ता का ही सहारा है. विगत दिनों भोपाल में कैलाश जोशी के जन्म जयंती समारोह में भाजपा और संघ संगठन से जुड़े बड़े-बड़े राजनेताओं से मुलाकात हुई अब फिर से अपनी जमीन की तलाश में दीपक जोशी लग गए हैं. हालांकि देवास जिले में अब ऐसी कोई सीट नहीं बची जहां उनकी दाल गल सके.
विश्वस्त सूत्रों की माने तो भोपाल क्षेत्र में ही किसी विधानसभा से वह भाग्य आजमा सकते हैं लेकिन यह सब कुछ भाजपा संगठन की सहमति के बगैर संभव नहीं है. दूसरे स्तर की राजनीति जिसमें किसी निगम मंडल का अध्यक्ष बनने की भी कवायद लगाइ जा रही है. हालांकि दीपक जोशी के सुपुत्र जयवर्धन जोशी भारतीय जनता पार्टी संगठन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं लेकिन विधानसभा से चुनाव लडऩा उनके बस की बात नहीं. अब किस्मत से बागली विधानसभा सामान्य सीट होती है तो दीपक जोशी की घर वापसी हो सकती है.
माइक्रो फाइनेन्स का मकड जाल
मंदसौर जिले में माइक्रो फाइनेन्स का मकड जाल बढ़ता जा रहा है. ये गरीब मजदूर वर्ग की मज़बूरी का फायदा उठाकर मनमाने ब्याज लगाकर वसूली करते चले जा रहे हैं. मंदसौर जिले सहित माइक्रो फाइनेन्स के नाम से गरोठ शामगढ़ में आरबीआई की गाइड लाइन की धज्जिया उड़ा रहे ऑफिस और बैंक संचालित हो रहे हैं. कई लोन बाँटने वाले माइक्रो फाइनेंन्स के एजेंट कमीशन और सेलरी के लिए दिनभर छोटी मोटी दुकान और गांव मे घर घर जा चिकनी चुपड़ी बातों में उलझा कर लोन देकर मनमाना ब्याज वसूल कर रहे हैं. जिले मे कई सोसाइटी और माइक्रो लोन कंपनियों सहित समूह लोन का कारोबार फल फूल रहा है. आम लोगों को पता ही नहीं कौन आरबीआई से कनेक्ट है और कौन फर्जी. अंतत: नागरिकों के साथ बढ़ती लूट खसोट को लेकर हाल ही में जिला पुलिस कप्तान ने जांच के लिए थाना प्रभारियों को आदेश जारी किए हैं. अब देखना होगा कि इसमें कितने फर्जी निकलते हैं और क्या कार्रवाई होती है.
विधायकों को नसीहत
अंचल के कई विधायकों में ठसका दिखाने का चलन हावी होता जा रहा है. उनकी भूमिका अक्सर उनके पुत्र निभाते जब-तब नजर आ जाते हैं. विगत दिनों ऐसे जनप्रतिनिधि पार्टी की बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निशाने पर रहे. नसीहत दी गई है कि आप सभी अपने परिवार को आगे बढ़ाने की बजाए पार्टी को आगे बढ़ाएं. सरकारी कामों और संगठन के कामों में विधायक खुद पहुंचे और बेटों को ना भेजें. क्योंकि कई जगहों पर बेटा ही भाषण देकर आ जाता है. इसलिए इन सब बातों का विशेष ध्यान रखा जाए.
