ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
ग्वालियर चंबल में अतिवृष्टि और बाढ़ ने इस बार जो कहर बरपाया, उसकी मिशाल पिछली एक सदी में कम ही मिलती है। अकेले शिवपुरी गुना की ही बात करें तो इस विभीषिका में 29 लोग काल कवलित हो गए। किसानों की साल भर की आजीविका का एकमेव जरिया फसल बर्बाद हो गई, सो अलग। मुसीबत की इस घड़ी में सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचकर न सिर्फ उन्हें हिम्मत बंधाई बल्कि सूबे की सरकार की तरफ से यह भरोसा भी दिया कि राज्य सरकार प्रत्येक पीड़ित के साथ खड़ी है और सरकारी इमदाद में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
जो लोग बाढ़ और अतिवृष्टि में मारे गए, उनके परिजनों को तो सहायता मिलेगी ही, इसके अलावा जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उनके खेतों पर पहुंचकर नुकसान के सर्वे के लिए तहसीलदार, पटवारी और रेवेन्यू अमले को फील्ड में उतार दिया गया है। आपदा की घड़ी में प्रदेश के मुखिया के साथ सिंधिया द्वारा किए गए दौरे से चंबल और मालवा के संधिस्थल पर बसे शिवपुरी गुना के निवासियों को जहां सुकून मिला है वहीं संभाग के अन्य जिलों ग्वालियर, दतिया, मुरैना, श्योपुर और भिंड के लोगों को इस बात की कशिश है कि सीएम और सिंधिया ऐसा ही दौरा उनके जिलों में भी करते तो संकट की बेला में उनके इलाकों पर भी नियामतों की बरसात होती। लेकिन सीएम का दौरा फिलवक्त सिंधिया के संसदीय क्षेत्र तक ही सीमित रहा है। सूत्रों की मानें तो सीएम के सिंधिया के साथ एक और दौरे का प्लान किया जा रहा है जो ग्वालियर, दतिया , भिंड और मुरैना पर केंद्रित रहेगा। इन तीनों जिलों के भाजपा सांसदों ने अपनी बात श्यामला हिल्स तक पहुंचाई है।
खेल से होकर भी गुजरता है राजनीति का रास्ता
विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह के बड़े बेटे जहां राजनीति के साथ खेल प्रशासक की भी भूमिका में हैं और हॉकी इंडिया समेत कई खेल संगठनों में सक्रिय दखल रखते हैं वहीं अब रघु भैया के नाम से पहचान रखने वाले स्पीकर महोदय के कनिष्ठ पुत्र प्रबल प्रताप सिंह ने भी सियासत के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर चलने के लिए खुद को मुकम्मल बनाने खेलों का रास्ता चुना है। बॉलीवुड के परवीन डबास और प्रीति झंगियानी ने ग्वालियर शहर में प्रो पंजा टूर्नामेंट के आयोजन की आधिकारिक घोषणा की और इसके बाद सीज़न 2 के रोमांचक मैच शुरू हुए तो इसके आयोजन की पूरी कमान रघु ने ही संभाल ली।
इतना ही नहीं, मशल्स के खेल प्रो पंजा लीग में ग्लैमर का चटक रंग भरने के लिए रघु मुंबई से ग्रेट खली, अभिनेता राजपाल यादव और विजेंद्र सिंह जैसे सितारों को भी ग्वालियर ले आए हैं। बॉलीवुड की कई फिल्मों में अभिनय कर चुकीं अभिनेत्री प्रीति झिंगयानी और परवीन डबास पहले से ही इस प्रो पंजा लीग के आईकॉन बने हुए हैं। नरेन्द्र सिंह के दोनों पुत्र रामू और रघु राजनीति में अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तत्पर हैं लेकिन पार्टी नेतृत्व द्वारा नेता पुत्रों के लिए तमाम बंदिशें लगाने के चलते फिलहाल बात उस तरह से नहीं बन पा रही जैसी कि उम्मीद थी। जब तक सियासत में रास्ता नहीं बनता है, तब तक खेलकूद ही सही, शायद यही सोचकर दोनों नेतापुत्र खेल प्रशासक के रूप में परफॉर्मेंस देने में व्यस्त हैं।
करीब आ गए निगम चुनाव, वार्ड मौहल्लों की सियासत तेज
ग्वालियर निगम परिषद ने अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लिया। इस तरह नगर निगम चुनाव में अब बमुश्किल दो साल से भी कम वक्त बचा है। अगला महापौर कौन बनेगा, यह काफी हद तक रोटेशन पद्धति से होने वाले आरक्षण पर निर्भर करता है। यही स्थिति पार्षद पद के लिए भी है। अभी जिन वार्डों में सामान्य वर्ग से पार्षद हैं, संभव है कि दो साल बाद वह वार्ड अजा वर्ग के लिए रिजर्व हो जाए। यह भी संभव है कि जिन वार्डों में पुरुष प्रतिनिधि नुमाइंदगी कर रहे हैं, अगले निगम चुनाव में वह वार्ड महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाए। इस असमंजश भरे माहौल के बावजूद सियासी हलकों में नगर निगम चुनाव की तैयारियां जारी हैं।
मौजूदा पार्षद भी दोबारा जल विहार पहुंचने के लिए अभी से नाराजों को मनाने के साथ दीगर काम छोड़कर वार्ड को ज्यादा वक्त दे रहे हैं। करीब पचपन साल के लंबे अंतराल के बाद पिछली बार यहां कांग्रेस ने अपना महापौर बनाया था, लिहाजा कांग्रेस के समक्ष चुनौती इस जीत के सिलसिले को बरकरार रखने की है, वहीं भाजपा हर कीमत पर यह सीट कांग्रेस के कब्जे से छीनने के प्रति आश्वस्त है। हो सकता है कि नई निगम परिषद जल विहार के बजाए मोतीमहल के समीप जमुना बाग में लगे, जहां नया निगम परिषद भवन बनाने के लिए दिन रात काम चल रहा है।
