उत्तर बंगाल में एसआईआर विवाद, राजनीतिक दांव-पेच के बीच कल होगा मतदान

सिलीगुड़ी, 22 अप्रैल (वार्ता) उत्तर बंगाल के आठ जिलों के मतदाता विधानसभा चुनावों में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग 23 अप्रैल को करने के लिए तैयार हैं।

इस चुनावी लड़ाई में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और प्रमुख विपक्षी भारतीय जनता पार्टी सहित प्रमुख राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा। उत्तर बंगाल में कूच बिहार से लेकर मालदा तक 54 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें कलिम्पोंग, दार्जिलिंग और कुर्सियोंग के पहाड़ी क्षेत्र भी शामिल हैं। हालांकि, इस बार चुनाव आयोग ने चुनावों के लिए अभूतपूर्व व्यवस्थाएं की हैं जिनमें अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती, व्यापक सीसीटीवी निगरानी और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के कई अन्य उपाय शामिल हैं।

इन विस्तृत व्यवस्थाओं के बावजूद, मतदान के दिन से पहले मतदान केंद्रों पर तैनात चुनाव कर्मियों ने अपने मतपत्र डालते समय कई शिकायतें दर्ज कराई हैं। यह आरोप भी सामने आए हैं कि कुछ मामलों में असली मतदाताओं के लिए बने वोट कथित तौर पर अन्य लोगों द्वारा डाले गए, जिससे पूरी प्रक्रिया के प्रबंधन पर सवाल उठ रहे हैं।

ये चुनाव उच्चतम न्यायालय की देखरेख में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को लेकर जारी असंतोष के बीच हो रहे हैं। मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग असंतुष्ट है क्योंकि लगभग 27 लाख नाम अभी भी न्यायाधिकरणों के समक्ष विचाराधीन हैं। इनमें से कई लोग वैध मतदाता होने का दावा करते हैं लेकिन उनकी मतदाता सूची में नाम शामिल करने की प्रक्रिया अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है।

इस अधूरी पुनरावलोकन प्रक्रिया ने चुनावी माहौल पर एक ग्रहण लगा दिया है, और राजनीतिक दल इस मुद्दे पर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं। इस बीच, अधीर रंजन चौधरी और मौसम नूर समेत कांग्रेस नेताओं ने तृणमूल, भाजपा और चुनाव आयोग तीनों की आलोचना करते हुए मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने तक चुनाव स्थगित किए जाएं। माकपा ने भी सत्ताधारी और विपक्षी दोनों दलों की कड़ी आलोचना की है।

विवाद के बावजूद श्री शाह और सुश्री बनर्जी दोनों ने आश्वासन दिया है कि अगर उन्हें सत्ता में आने के लिए वोट दिया जाता है तो उनकी संबंधित पार्टियां यह सुनिश्चित करेंगी कि वर्तमान में मतदाता सूची से बाहर हुए सभी वास्तविक मतदाताओं को शामिल किया जाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगभग 27 लाख मतदाताओं को लेकर बनी अनिश्चितता चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकती है, जिससे असंतोष भड़क सकता है जो ईवीएम परिणामों में परिलक्षित हो सकता है और तृणमूल और भाजपा दोनों को प्रभावित कर सकता है।

जहां कांग्रेस और वाम मोर्चा विशेष रूप से माकपा 2021 में उत्तर बंगाल में एक भी सीट न जीतने के बाद इस बार वहां अपना खाता खोलने की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं भाजपा और तृणमूल अपनी-अपनी सीटों को बरकरार रखने और बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 2021 में भाजपा ने इस क्षेत्र में बहुमत प्राप्त किया था हालांकि उपचुनावों में हार और दलबदल के कारण बाद में उसे नुकसान हुआ, जिसमें दो विधायक तृणमूल में शामिल हो गए।

इस चुनाव में जिलावार राजनीतिक परिदृश्य इस प्रकार है।

कूच बिहार (नौ सीटें, पांच अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित): 2021 में, भाजपा ने सात सीटों पर जीत हासिल करते हुए 49.5 प्रतिशत वोट प्राप्त किए, जबकि तृणमूल ने 44.8 प्रतिशत वोटों के साथ दो सीटें जीतीं। एक उल्लेखनीय मुकाबले में तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने तृणमूल के के उदययन गुहा को मात्र 57 वोटों से हराया था। हालांकि, श्री गुहा ने उपचुनाव में रिकॉर्ड अंतर से सीट वापस जीत ली। इस बार श्री, प्रमाणिक मथाभंगा (अनुसूचित जाति) से चुनाव लड़ रहे हैं, और विश्लेषकों का मानना है कि तृणमूल कुछ खोई हुई सीट वापस हासिल कर सकती है।

अलीपुरद्वार (पांच सीटें): 2021 में भाजपा ने लगभग 50 प्रतिशत मत हिस्सेदारी के साथ सभी पांचों सीटों पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, तृणमूल ने 2024 के संसदीय चुनावों के बाद हुए उपचुनाव में मदारीहाट सीट पर फिर से कब्जा कर लिया। फलाकाटा में भाजपा के दीपक बर्मन, जिन्होंने पहले 1.8 प्रतिशत के मामूली अंतर से जीत दर्ज की थी, फिर से मैदान में हैं। तृणमूल समर्थकों द्वारा उन पर हाल ही में हुए हमले के बाद सहानुभूति वोट उनके पक्ष में काम कर सकते हैं।

जलपाईगुड़ी (सात सीटें): जिले में जो अनुसूचित जनजाति और चार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं। 2021 में तृणमूल ने लगभग 43 प्रतिशत वोटों के साथ तीन सीटें जीती थीं। बाद में पार्टी ने उपचुनाव में धूपगुड़ी सीट पर कब्जा कर लिया। अब भाजपा धूपगुड़ी सीट पर फिर से कब्जा करने और राजगंज और जलपाईगुड़ी जैसी सीटों पर निशाना साधकर अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि तृणमूल ने जलपाईगुड़ी सीट पर मात्र 0.4 प्रतिशत के मामूली अंतर से जीत हासिल की थी।

कालिम्पोंग (एक सीट): 2021 में क्षेत्रीय ताकतों के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार रुदेन सदा लेपचा ने यह सीट जीती थी। इस बार वह जीटीए प्रमुख अनित थापा के नेतृत्व वाली भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के समर्थन से चुनाव लड़ रहे हैं और उनका मुकाबला भाजपा के भारत छेत्री से है, जो भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान हैं।

दार्जिलिंग (पांच सीटें): 2021 में भाजपा ने सिलीगुड़ी और अन्य तराई क्षेत्रों सहित दार्जिलिंग की सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी। 2026 में मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है, खासकर सिलीगुड़ी में, जहां तृणमूल नेता और महापौर गौतम देब भाजपा विधायक डॉ. शंकर घोष को चुनौती दे रहे हैं। दार्जिलिंग में अजय एडवर्ड्स के आने से मुकाबला और भी कड़ा हो गया है जिससे भाजपा समर्थित और क्षेत्रीय उम्मीदवारों के बीच त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
उत्तर दिनाजपुर (नौ सीटें): 2021 में तृणमूल का दबदबा रहा, उसने 53.3 प्रतिशत मतदान हिस्सेदारी के साथ सात सीटें जीतीं, जबकि भाजपा को दो सीटें मिलीं। रायगंज से भाजपा के एक विधायक बाद में तृणमूल में शामिल हो गए।

दक्षिण दिनाजपुर (छह सीटें): 2021 में तृणमूल और भाजपा के बीच बराबरी का मुकाबला था दोनों ने तीन-तीन सीटें जीतीं। तृणमूल को 47.2 प्रतिशत वोट मिले जो भाजपा के 43 प्रतिशत से थोड़ा अधिक था।

मालदा (12 सीटें): परंपरागत रूप से कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले मालदा में 2021 में स्थिति में बदलाव देखने को मिला, जहां तृणमूल ने आठ सीटें और भाजपा ने इंग्लिश बाजार समेत चार सीटें जीतीं। कांग्रेस एक ही सीट जीतने में विफल रही। तृणमूल को 53 प्रतिशत, भाजपा को 32.8 प्रतिशत, कांग्रेस को 8.8 प्रतिशत और वामपंथी दलों को 1.6 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।

कांग्रेस को 2026 में वापसी की उम्मीद है, खासकर पूर्व सांसद मौसम नूर के पार्टी में फिर से शामिल होने और मालतीपुर से चुनाव लड़ने के बाद। भाजपा का लक्ष्य मानिकचक और बैष्णबनगर को निशाना बनाकर अपनी उपस्थिति बढ़ाना है। गाजोल समेत कई निर्वाचन क्षेत्रों में त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है। इंग्लिश बाजार सीट पर विशेष ध्यान केंद्रित है जहां आईएसएफ समर्थित माकपा के दिग्गज नेता अंबर मित्रा, तृणमूल के आशीष कुंडू और भाजपा के अमलान भादुरी को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। यह एक ध्रुवीकृत राजनीतिक माहौल है।

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