खैरतल-तिजारा | किशनगढ़ बास के छोटे से गांव बगथला के रहने वाले जुबेर खां ने अपनी शारीरिक अक्षमता को कमजोरी के बजाय ताकत बनाकर इतिहास रच दिया है। बचपन में जब गांव के बच्चे उन्हें दिव्यांग होने के कारण खेल से दूर रखते थे, तब उन्होंने मायूस होने के बजाय घर की छत पर ही अभ्यास शुरू किया। जुबेर के इस कठिन सफर में उनके बेटे उमर ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई, जो छत पर नेट लगाकर घंटों उन्हें गेंदबाजी करता था। परिवार के विरोध और सामाजिक तानों के बावजूद जुबेर ने हार नहीं मानी और आज भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में अपनी जगह पक्की कर ली है।
जुबेर की किस्मत तब बदली जब उनके एक दोस्त ने उन्हें अलवर जिला टीम के ट्रायल की सूचना दी। बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर पहले उनका चयन जिला टीम में हुआ और फिर उन्होंने राजस्थान की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कई मैच जिताऊ पारियां खेलीं। उनके शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन को देखते हुए राष्ट्रीय चयनकर्ताओं ने उन्हें भारतीय टीम के लिए चुना है। जुबेर ने बताया कि वह टीवी पर भारत-पाकिस्तान के मैच देखकर हमेशा देश के लिए खेलने का सपना संजोते थे, जो अब हकीकत में बदलने जा रहा है। उनकी सफलता उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है जो विपरीत परिस्थितियों में घुटने टेक देते हैं।
जुबेर खां आगामी 25 मई को चेन्नई में भारतीय टीम के साथ रिपोर्ट करेंगे, जिसके बाद टीम श्रीलंका के कोलंबो के लिए रवाना होगी। वहां भारत और श्रीलंका के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज खेली जाएगी। जुबेर इस टीम में एक मुख्य ऑलराउंडर की भूमिका निभाएंगे। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर भारत को सीरीज जिताने में अहम योगदान देंगे। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे जिले में खुशी की लहर है और जो लोग कभी उन्हें खेल से दूर रहने की सलाह देते थे, आज वे ही उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व कर रहे हैं।

