
देवास। शहर के ढांचा भवन में शनिवार की रात में हुए हत्याकांड में जान गंवाने वाले बच्चों का असली पिता रविवार को सुबह मथुरा से अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ देवास पहुंचा। यहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पीएम रुम में रखे दोनों बच्चों के शव उसे सौंप दिए गए। जिसे लेकर पिता व अन्य लोग दोपहर में दो निजी वाहनों से मथुरा के लिए रवाना हुए। इधर औद्योगिक थाना पुलिस ने आरोपी लोकेंद्र मालवीय को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे 6 अगस्त तक रिमांड पर पुलिस को सौंप दिया है। रविवार को विष्णु कटारा उसकी बहन, जीजा, भाई सहित 10 लोग देवास में सबसे पहले औद्योगिक थाने पर पहुंचे। यहां महिला प्रिया को देखा तो पति और बहन ने आपा खो दिया। उससे सवाल-जबाव करते हुए मारने दौड़े। पुलिस ने हस्तक्षेप कर महिला को बचाया। महिला के चेहरे पर बच्चों को खोने का कोई गम नजर नहीं आया। बच्चों की बुआ नीतू ने कहा कि मुझे बोल देती बच्चे ले जाओ तो ले जाती तूने बच्चों को मरवा क्यों दिया तो महिला प्रिया बोली ले जाती क्यों नहीं आई जबाव देती रही।
सबसे बड़े बेटे को मैं घर ले गया था, अन्यथा उसे भी मरवा देती
पति विष्णु कटारा ने बताया कि मेरे तीन बच्चे थे। दो बेटे और एक बेटी। बड़े बेटे को मैं पीथमपुर से घर ले गया था। पत्नी और लोकेंद्र ने उसका हाथ भी जला दिया था। यदि वह देवास में होता तो आज उसकी भी हत्या हो जाती। वह 9 साल का है। मेरी बहन के पास मथुरा में रहता है। पहले हम सभी लोग मथुरा में रहते थे। मेरी पत्नी भी वहीं रहती थी, इससे पहचान हो गई। मैंने लव मैरिज कर ली इसके बाद पीथमपुर आ गए। पीथमपुर में पत्नी की लोकेंद्र से पहचान हुई। होली के समय पत्नी उसके साथ भाग गई। मैंने रिपोर्ट की तो पुलिस खोजकर लाई। पुलिस से प्रिया ने कहा मैं दो बच्चों को ले जाऊंगी, बड़ा बेटा पिता को दे दिया। विष्णु का कहना है मैंने पीथमपुर पुलिस को उस समय भी कहा था यह मेरे बच्चों को मार देगी पर पुलिस ने मेरी एक नहीं सुनी और थाने से भगा दिया। और बच्चे उसको दे दिए। आज मेरे बच्चों की उसने अपने प्रेमी से हत्या करा दी। मेरी पत्नी पर भी हत्या का मामला दर्ज कर उसे जेल भेजें। मैं न्यायालय की शरण लूंगा।
मैं शव घर नहीं ले जा सकता
मृत बच्चों के पिता विष्णु कटारा ने बताया दोनों छोटे बच्चे हैं इसलिए उनकी दाह संस्कार नहीं कर सकते हैं। चंबल नदी में जलप्रवाह (जल दाग) करेंगे। मैं शव घर भी नहीं ले जा सकता हूं मेरे माता पिता इनके मृत शरीर नहीं देख पाएंगें। अंतिम संस्कार के बाद घर पहुंचेंगे।
