
शुजालपुर,प्रदेश सरकार ने गत चार वर्ष पूर्व पृथक से बजट देकर कई गांवों में गौशालाएं निर्मित कराई. साथ ही शासकीय अनुदान पर कई समितियां गौशालाओं का संचालन कर रही है, सरकार की मंशा है कि इन गौशालाओं में आवारा मवेशी रखे जाए, जिससे कि सडक़ों पर आवारा मवेशियों का विचरण न हो और किसानों को आवारा मवेशियों से फसलों का नुकसान न हो. लेकिन सरकार की यह मंशा पुरी नहीं हो रही है, सडक़ों पर अभी भी मवेशी राज बरकरार है. शहर स्थित हाईवे सहित आंतरिक मार्गो पर मवेशियों का जमावड़ा देखा जा सकता है. इन मवेशियों के कारण हादसे भी होते है. जिसमें मवेशियों के साथ ही मानव जीवन पर भी खतरा रहता है.
शहर में पिछले कुछ दिनों से सांडों का आतंक भी देखा जा रहा है, कई बार सार्वजनिक स्थानों पर सांडों की लड़ाई आमजन के लिए मुसिबत भरी हो रही है. पिछले दिनों जहां चित्रांश नगर में सांड लडते हुए मकान के परिसर में घुस गए और मौजूद महिलाओं को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा, शनिवार को भी लोहिया मार्ग पर सांडों की लड़ाई से दुकानदार का आर्थिक नुकसान हुआ, यहां पर स्थित श्रीहरि ज्वेलर्स दुकान के सामने लगी रेलिंग व सीडिया सांडों ने क्षतिग्रस्त कर दी. प्रशासन और नगर पालिका शहर में कोई बडा आयोजन होने पर या वीआईपी के आने पर इन मवेशियों को खदेड कर चार दीवारी वाले परिसर में रोक देती है, जब आयोजन सम्पन्न होता है तो इन्हे फिर से खुला छोड दिया जाता है.
शहर की सडक़ों पर मवेशी राज…
शहर के कुछ चौराहे तो ऐसे है जहां पर दिनभर मवेशी बीच में बैठे रहते है. विशेष रूप से वर्षाकाल लगते ही इन आवारा मवेशियों की तादात सडक़ों पर बढ़ जाती है क्योकि मैदानों व कच्ची जगह गीली हो जाने के कारण उक्त आवारा मवेशी डामरीकृत अथवा सीसीरोड पर बैठते है. उल्लेखनीय है कि पूर्व में सडक़ पर बैठे एक मवेशी से मोटर साईकल टकरा जाने के कारण पुलिस आरक्षक की दुर्घटना में मौत भी हो चुकी है. इसी प्रकार कई वाहन चालक मवेशियों को बचाने के चक्कर में गिरकर घायल भी हो गए है.
यातायात होता है अवरूद्ध…
वैसे ही नगर में यातायात व्यवस्था बदहाल हैै आए दिन सडक़ दुर्घटनाएं होती रहती हैै. उस पर मुख्य मार्गोंे पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा नागरिकों के लिए सिर दर्द बनता जा रहा है. मुख्य रूप से नगर के सबसे व्यस्ततम मार्ग सिटी मंडी रोड़ तथा महात्मा गांधी मार्ग पर खासी परेशानी उठाना पड़ती है इन मवेशियों के कारण बताया जाता है कि इन आवारा मवेशियों में से कई दुधारू जानवर भी हैै. इनके मालिक दूध दोहने के समय इन्हे बाजार से ढूंढ कर घर ले जाते हैै, काम होते ही छोड़ दिया जाता हैै वापस बाजारों में. दुकानों पर मुंह मारना और सडक़ पर धामाचौकड़ी करने के कारण कई बार नागरिक भी इनका शिकार हो जाते हैैं.
गौशाला वाले रखने को तैयार नहीं…
नगर पालिका द्वारा पूर्व में इन आवारा मवेशियों को आबादी क्षेत्र से हटाने के उद्देश्य से प्रयास किए थे. लेकिन प्रशासन का सहयोग नहीं मिलने के कारण सफलता नहीं मिल सकी. नगर पालिका ने सडक़ों पर घुमने वाले मवेशियों को शासन की मदद से संचालित हो रही गौशालाओं में छोडने की योजना बनाई थी लेकिन गोशाला संचालकों की अरूची के चलते मवेशी सडक़ों से नहीं हट पाए.
