
इंदौर. महाराजा तुकोजीराव हॉस्पिटल में 23 जुलाई बुधवार को जन्मी दो सिर वाली बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है. फिलहाल उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है और डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने की हर संभव कोशिश कर रही है. लेकिन मेडिकल साइंस की सीमाएं खुद डॉक्टरों को मजबूर कर रही हैं. डॉक्टरों का कहना है कि गर्दन से जुड़े दोनों के सिर है, मगर शरीर नहीं. इसलिए इन्हें अलग नहीं किया जा सकता.
पीडियाट्रिक स्पेशलिस्ट डॉ. प्रीति मालपानी ने साफ कहा बच्ची के गर्दन से दोनों सिर जुड़े हैं, इसलिए इन्हें अलग करना संभव नहीं है. ऐसे मामलों में सर्जरी का कोई रास्ता नहीं बचता. डिलीवरी से पहले परिजन जुड़वां संतान मान रहे थे, लेकिन जन्म के बाद मामला डॉक्टरों के लिए भी एक दुर्लभ मेडिकल केस बन गया. दो सिर और एक धड़ वाली यह बच्ची अब एक केस स्टडी बन चुकी है. डॉ. मालपानी का कहना है कि यह मेडिकल कंडीशन बेहद दुर्लभ है, करीब 1 से 2 लाख में ऐसा एक केस देखने को मिलता है. इस प्रकार की विकृति का बड़ा कारण जेनेटिक होता है. देवास निवासी जिस महिला ने बच्ची को जन्म दिया, उसका पिछला गर्भ भी तीन माह में गिर चुका था. डॉक्टर्स का मानना है कि यह भी जेनेटिक डिसऑर्डर से जुड़ा कारण रहा होगा. उनके मुताबिक आमतौर पर ऐसे भ्रूण या तो गर्भ में ही दम तोड़ देते हैं या जन्म के कुछ ही घंटों या दिनों के भीतर उनकी मौत हो जाती है. इस केस में बच्ची के दो सिर हैं लेकिन शरीर एक ही है, यानी सिर्फ एक दिल, एक लिवर, एक फेफड़ा और एक पाचन तंत्र. मेडिकल टीम के सामने अब दोहरी चुनौती है, एक ओर बच्ची की जान बचाना, दूसरी ओर भविष्य की संभावित जटिलताओं से निपटना. अगर बच्ची जीवित रहती भी है, तो भविष्य में उसे गंभीर हार्ट, न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही परिवार के सामने सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियां भी रहेंगी. फिलहाल एमटीएच की टीम बच्ची की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है और हर संभव मेडिकल सहयोग दे रही है, लेकिन डॉक्टर मानते हैं कि सर्वाइवल की संभावना बेहद सीमित है. यह मामला मेडिकल साइंस के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है.
स्पाइनल कॉर्ड अलग, लेकिन बाकी अंग एक
डॉक्टरों के मुताबिक इस केस में दोनों सिरों की स्पाइनल कॉर्ड अलग-अलग हैं, लेकिन शरीर के बाकी अंग साझा हैं. यही कारण है कि इन्हें सर्जरी के जरिए अलग नहीं किया जा सकता. डॉ. मालपानी ने साफ कहा “देश में सिर जुड़े बच्चों को अलग करने का अब तक कोई सफल उदाहरण नहीं है. कुछ मामलों में शरीर का हिस्सा जुड़ा होने पर सर्जरी की जाती है, लेकिन जब ब्रेन और गर्दन जुड़ी हो तो कोई विकल्प नहीं रहता.
